
प्रेम, मौन और पुनरागमन की कथा: लेखक निखिल आशा का पहला उपन्यास ‘द रूम ऑफ रिटर्न’ प्रकाशित।
दरभंगा: प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मिक यात्रा की गहराइयों को शब्दों में पिरोता लेखक निखिल आशा का पहला उपन्यास ‘The Room of Return’शनिवार को दरभंगा में आयोजित एक भावनात्मक लोकार्पण समारोह में औपचारिक रूप से प्रकाशित हुआ। इस अवसर पर साहित्यप्रेमियों और लेखकीय संसार से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को खास बना दिया।

यह उपन्यास Amazon Kindle पर ई-बुक के रूप में पहले से ही उपलब्ध है, वहीं अब यह पेपरबैक संस्करण में भी Amazon.com पर ऑर्डर के लिए उपलब्ध हो गया है।

लेखक निखिल आशा ने इस अवसर पर कहा- यह किताब मैंने नहीं लिखी — यह किताब खुद मेरे भीतर घटी है। यह प्रेम, मौन और पुनरागमन की कहानी है। और हर उस व्यक्ति के लिए है, जिसने कभी किसी को भीतर तक चाहा… और फिर भी चुपचाप विदा दे दी।”

‘The Room of Return’ दो पात्रों — आरव और मीरा — की संवेदनशील यात्रा है, जो प्रेम के उस रूप को उजागर करती है जो सामाजिक परिभाषाओं से परे, मौन और प्रतीक्षा के बीच जीता है। यह उपन्यास एक सामान्य प्रेम कथा नहीं, बल्कि उन अधूरे रिश्तों की आत्मिक कथा है जिन्हें समाज भले स्वीकार न करे, पर आत्मा से कभी विलग नहीं किया जा सकता।

लेखक के अनुसार, यह रचना महादेव की शांति और तपस्या से प्रेरित है, जहां प्रेम अधिकार नहीं, समर्पण होता है।
निखिल आशा पेशे से शिक्षक, मन से साहित्यप्रेमी और साधक हैं। यह उनका पहला प्रकाशित उपन्यास है, लेकिन इसकी भाषा, भाव और संवेदनशीलता में वह गहराई है जो वर्षों की आत्मिक साधना से आती है। उनकी लेखनी में शिव-दर्शन की मौन झलक और जीवन के अनुभवों की सार्थक अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

