Home Featured मध्यमा पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव: अब रामचरितमानस और गीता पढ़ेंगे छात्र।
Featured - मुख्य - July 12, 2025

मध्यमा पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव: अब रामचरितमानस और गीता पढ़ेंगे छात्र।

दरभंगा: संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने मध्यमा पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव करते हुए अब छात्रों को रामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ाने का निर्णय लिया है। गीता के प्रमुख अंश नैतिक शिक्षा के रूप में शामिल किए गए हैं। साथ ही पाठ्यक्रम में बिहार की महान विभूतियों — विद्यापति, भिखारी ठाकुर और दशरथ मांझी के जीवन परिचय को भी जोड़ा गया है।

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बोर्ड के सचिव नीरज कुमार ने अध्यक्ष की अनुमति से 10 जुलाई को छह सदस्यीय पाठ्यक्रम निर्माण समिति का गठन किया था। समिति की बैठक 11 और 12 जुलाई को बोर्ड कार्यालय में हुई, जिसकी अध्यक्षता मृत्युंजय कुमार झा ने की। बैठक में प्रथम से दशम वर्ग तक के पाठ्यक्रम की समीक्षा कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बदलाव किए गए।

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संशोधित पाठ्यक्रम को अंतिम अनुमोदन के लिए बोर्ड के मान्य सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पाठ्यक्रम उपसमिति में अरुण कुमार झा, चन्द्र किशोर कुमार, डॉ. रामसेवक झा, निरंजन कुमार दीक्षित, डॉ. विभूतिनाथ झा और डॉ. हरेराम कुमार उपाध्याय सदस्य रहे।

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संस्कृत साहित्य की प्रसिद्ध रचना ‘शिवराजविजयम्’ (रचयिता: पं. अंबिकादत्त व्यास) और दर्शनशास्त्र का मूल ग्रंथ ‘तर्कसंग्रह’ भी नए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

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अनिवार्य विषयों में हिन्दी, अंग्रेजी और सामान्य विज्ञान यथावत रहेंगे। जबकि ऐच्छिक विषयों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौरोहित्य, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, योग और कम्प्यूटर को जोड़ा गया है।

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