आखिर मिल गया लावारिस फेंके गये बच्चों का वारिस।

दरभंगा।अभिषेक कुमार
कहा जाता है कि औरत ममता की मूर्ति होती है और अपने बच्चे के खातिर कुछ भी कर सकती है। पर कभी कभी अपवाद भी देखने को मिल जाता है और ऐसा ही अपवाद देखने को मिला जब शुक्रवार को कार्टून में लपेट कर फेंके गये नवजात की गुत्थी सुलझी और उसे लेने उसके माँ-बाप पहुंचे।
शुक्रवार को बच्चे को जन्म देने वाली सरिता देवी अपने पति व परिजनों के साथ विशेष दत्तक संरक्षण केन्द्र पहुंची। बच्चे पर अपना दावा प्रस्तुत कर उसे लेने की बात कही। इस पूरे मामले पर बच्चे के पिता नगर थाना क्षेत्र के मौलागंज निवासी कुशेश्वर महतो ने बताया कि सोमवार को उसकी पत्नी किलाघाट स्थित एक निजी नर्सिंग होम एक साथ तीन बच्चे दो लड़का और एक लड़की को जन्म दी। तीनों बच्चे और जच्चा को डॉक्टर ने स्वस्थ बताते हुए मंगलवार को डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद उसने अपनी पत्नी को उसके मायके बहादुरपुर थाना क्षेत्र के छिपलिया पहुंचा दिया। कुशेश्वर ने अपनी सास फूलदाई देवी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसी दिन देर शाम एक लड़का व एक लड़की को उसने कार्टन में रख टीबीडीसी वार्ड परिसर में फेंक दिया। श्री महतो ने बताया कि बुधवार को दो बच्चों के फेंके जाने की खबर अखबार में पढ़ने के बाद उसे संदेह हुआ तो वह भागा-भागा ससुराल आया। जहां अपने दो बच्चों को नहीं पाकर अपनी पत्नी व ससुराल के लोगों से पूछताछ करने लगा। काफी दवाब बनाने पर गुरुवार की रात सच्चाई सुन उसके पैर तले जमीन खिसक गई। आज वह अपने परिजनों के साथ विशेष दत्तक संरक्षण केन्द्र पहुंचा। साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद दोनों बच्चों को परिजनों के हवाले कर दिया गया। उसने बताया कि वह टेम्पो चलाकर अपने परिवार का जीवन यापन करता है। उसे पहले से दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी है। इस घटना से वह काफी दुखी है।

