
गीता हाथ मे लेकर नामांकन कराने पहुंचे जनसुराज से दरभंगा शहर के प्रत्याशी आर के मिश्रा, चुनाव को बताया पांडवों और कौरवों के बीच की लड़ाई।
दरभंगा: चुनावी रणभेड़ी बजते ही जहां उम्मीदवारों की फौज ढोल नगाड़ों और गाड़ियों के काफिले के साथ नामांकन जुलूस निकालते हैं, वहीं यदि कोई सादगी पुर्वक मौन जुलूस के साथ नामांकन को पहुंचे तो यह दृश्य सहसा अविश्वसनीय लगता है। परंतु दरभंगा शहर के जनसुराज प्रत्याशी पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके मिश्रा के नामांकन में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। श्यामा मंदिर परिसर से अपने समर्थकों के साथ हाथ मे गीता लिए मौन जुलूस के साथ लोगों का अभिवादन स्वीकार करते आरके मिश्रा नामांकन केलिए निकल पड़े। दरभंगा टावर के निकट महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपना मौन तोड़ा और वहीं से समर्थकों को संबोधित किया। उसके बाद प्रस्तावको एवं समर्थकों के साथ नामांकन केलिए नगर निगम परिसर स्थित नगर आयुक्त कार्यालय पहुंचे। नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने गीता के श्लोकों का हवाला देते हुए बिहार के इस चुनाव की तुलना कौरवों और पांडवों के युद्ध से की। उन्होंने नामांकन में भीड भाड़ और खर्चा करके सड़क जाम आदि जनता को तकलीफ देने की संस्कृति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भीड़ भाड़ और जाम कर जनता को परेशान नहीं करना चाहिए। हम जनता की समस्याओं के हल केलिए उनका प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि उनकी समस्याओं को बढाने केलिए। उन्होंने कहा कि दरभंगा के बदलाव केलिए यह चुनाव है और जनता ने बदलाव का मूड बना लिया है।

