Home Featured दरभंगा में वक्फ कानून के खिलाफ़ बड़ा विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर दिखा हुजूम।
Featured - मुख्य - April 12, 2025

दरभंगा में वक्फ कानून के खिलाफ़ बड़ा विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर दिखा हुजूम।

दरभंगा: दरभंगा में वक्फ संशोधन कानून के विरोध में बड़ा प्रदर्शन हुआ है। सड़कों पर सैकड़ों लोग उतरे, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर ‘वक्फ कानून रद्द करो’ के नारे लगाए। इस कानून के तहत वक्फ बोर्ड की शक्तियां सीमित की गई हैं।

दरअसल, वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ संविधान बचाओ लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ अभियान के बैनर तले दरभंगा के हमीदिया मदरसा किलाघाट से विशाल मौन जूलूस निकाला गया। जुलूस के माध्यम से वक्फ संशोधन कानून वापस लेने, संविधान पर भाजपा सरकार के खुल्लम – खुला हमला बंद करने तथा मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आजादी पर हमला बंद करने का आवाज़ बुलन्द किया गया।

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इस मौन जूलूस का नेतृत्व नफीसुल हक रिंकू, डब्बू खान, इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, मकसूद आलम पप्पू खां, रुस्तम कुरैशी, मुमताज आलम, अधिवक्ता अम्बर इमाम हाशमी छोटे मियां, रियाज खान कादरी, मो उमर, आश मोहम्मद, सचिन राम, जिला परिषद सदस्य हरि पासवान, राजू पासवान, शनिचरी देवी, मो जमाल हसन, साबिर हुसैन लड्डू, मुन्ना खान, अफताब अशरफ, अकरम सिद्दकी, जावेद इकबाल, तारिक रजा, राजा अंसारी, फिरोज आलम, मो आरजू अरुफ, मो रियासत अली आदि ने किया। जुलूस हमीदिया मदरसा से निकलकर नाका 5 होते हुए लहेरियासराय धरना स्थल पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। धरना स्थल पर आयोजित सभा की अध्यक्षता अभियान के संयोजक सह अध्यक्ष नफीसुल हक रिंकू ने किया. संचालन मो मुफ्ती शुभानी व रियाज खान कादरी ने किया।

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सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने दृढ़ता पूर्वक वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ आवाज़ बुलन्द किया और मोदी सरकार के इस सांप्रदायिक और संविधान विरोधी दांव का विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि यह कानून एक समुदाय के प्रति दुराग्रहपूर्ण है और मुस्लिम समुदाय को संविधान में प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के आधिकार पर प्रत्यक्ष हमला है। यह विधेयक धर्मांध कानून निर्माण का खुल्लम खुल्ला कृत्य है।

वक्ताओं ने कहा कि वक़्फ़ बोर्डों, वक़्फ़ परिषद और अन्य हित धारकों से किसी भी तरह के अर्थपूर्ण विचार विमर्श का सचेत अभाव विधेयक में रेखांकित किया जा सकता है। इसके अलावा विधेयक गैर मुस्लिम सदस्यों को वक़्फ़ बोर्डों में शामिल करने का प्रावधान करता है, यह किसी भी कानून के तहत अप्रत्याशित कदम है, जो जानबूझ कर मुस्लिमों को उनके संस्थानों के नियंत्रण से वंचित करता है।

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वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार के संविधान विरोधी कानून को पास कराने में तथाकथित सेकुलर पार्टी जदयू समेत उनके सहयोगियों के सहारे इस विधेयक को संसद से पास करा लिया है। लेकिन जदयू के इस विश्वासघात को जनता नहीं भूलेंगी जिसने एक बार फिर वक़्फ़ बोर्ड पर भाजपा के असंवैधानिक हमले के साथ स्वयं को संबद्ध कर लिया। जनता आने वाले चुनाव में करारा जवाब देगी।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून साम्प्रदायिक व संविधान विरोधी कानून है। भाजपा सरकार लगातार संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओ को कमजोर करने मे जुटी है। भाजपा के तीसरी बार सत्ता मे आते ही दलितों, महिलाओं और मुस्लिमो पर हमले तेज हो गये है.अब तो हर मस्जिद मे मंदिर खोजना आम बात हो गयी हैं। वक्फ संशोधन कानून काला कानून साबित होगा संघ भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के धार्मिक आजादी को कुचलने पर आमादा है। हम सभी सेकुलर और लोकतंत्र पसंद लोगों को इसका डटकर विरोध करना होगा।

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सभा को इमारते शरिया के अरशद रहमानी, भाकपा (माले) के अभिषेक कुमार, बैद्यनाथ यादव, भाकपा के राजीव चौधरी, अहमद अली, मो तमन्ने, राजद के जिलाध्यक्ष उदय शंकर यादव, मिठ्ठू खेड़िया, पूर्व विधायक फराज फातमी, नाजिया हसन उप महापौर, सरवर कमाल, अताउल्लाह खां पुत्तू, लड्डन खान, सोनू खान, रजनीश चौबे,कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दयानंद पासवान, मसकुर उस्मानी, मुहर्रम कमिटी सचिव तनवीर आलम, गंगा मण्डल, मो रिशु , समीर अल्फ़ाज़, देवेन्द्र कुमार, प्रिंस कुमार आदि ने सम्बोधित किया. सभा का समापन वक्तव्य पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अभियान समिति के संयोजक नफीसूल हक रिंकू ने किया।

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