
फर्जी डीएल कांड: पूर्व डीटीओ समेत पांच पर वारंट।
दरभंगा: फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जुनैद आलम की अदालत ने 31 जुलाई को तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) शशि शेखरम सहित पांच कर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। आरोपियों में लिपिक कुमार गौरव, डाटा एंट्री ऑपरेटर रूपेश कुमार, प्रोग्रामर विक्रमजीत प्रताप और एक अन्य कर्मचारी शामिल हैं। मामला लहेरियासराय थाना कांड संख्या 32/25 के तहत दर्ज है।

वारंट जारी हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जांच में खुलासा हुआ कि दरभंगा परिवहन कार्यालय में लंबे समय से फर्जी लाइसेंस जारी करने का खेल चल रहा था। एक ही लाइसेंस नंबर पर सात अलग-अलग लोगों को डीएल जारी कर दिया गया। यहां तक कि हिंदू को मुसलमान और मुसलमान को हिंदू बना दिया गया।

यह नेटवर्क बिहार के अलावा झारखंड और अरुणाचल प्रदेश तक फैला था। सबसे बड़ा मामला अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिला मुख्यालय जीरो से जुड़ा है, जहां 4 जनवरी 2019 को राना देव के नाम से जारी डीएल (नंबर AR0620190072011) को 21 अप्रैल 2022 को दरभंगा डीटीओ कार्यालय में बैकलॉग एंट्री के जरिए माइग्रेट कर 13 मार्च 2024 को सोहराब अली के नाम से जारी किया गया। इसके बाद वही डीएल झारखंड के हजारीबाग डीटीओ कार्यालय में विपिन राम के नाम से ट्रांसफर कर दिया गया।
इस घोटाले का खुलासा दरभंगा बार एसोसिएशन के अधिवक्ता राशिद खान ने किया, जो नामजद आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की दिशा में सक्रिय हैं।

