Home Featured भारत को भाषा सूत्र में नहीं बांधा जा सकता है : कुलपति।
Featured - मुख्य - December 15, 2024

भारत को भाषा सूत्र में नहीं बांधा जा सकता है : कुलपति।

दरभंगा: संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि लोगों ने संस्कृत को देवभाषा बोलकर देवलोक पहुंचाने का कार्य किया है। लोग अब संस्कृत को मृतभाषा बोलने पर तुला हुआ है। यह गलती हम सबकी है। भारत को भाषा सूत्र में बांधा नहीं जा सकता है।

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सब भाषाओं के विकास से ही संस्कृत की भी तरक्की होगी। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि सभी ज्ञान परंपरा संस्कृत से मिलती है। शुरू से लेकर अबतक दुनिया भारत से चरित्र निर्माण सीख रही है। भारत हमेशा ज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य किया है।भारत को हमेशा प्रकाशरत बने रहने की ज़रूरत है, ताकि भारत दोबारा विश्व गुरु बन सके। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता में भी लिखी गई है कि ज्ञान प्राप्त करना मुश्किल पथ है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए लगातार अध्ययन करने की जरूरत है। वे एलएनएमयू के बीएड (नियमित) एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान परम्परा को संबोधित कर रहे थे।

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इग्नू नई दिल्ली के प्रो अरविंद कुमार झा ने कहा कि मिथिला ने तर्क और न्याय परंपरा की शुरुआत की है। मैथिल होने के कारण आप तर्क परंपरा के संतान है। मिथिला हमेशा न्याय की धरती रही है। हम सबकी अब जिम्मेदारी है कि झूठे अभिमान के बदले कुछ काम करने की जरूरत है। डॉ. अरविंद कुमार मिलन ने सेमिनार में शामिल सभी सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समापन समारोह में डॉ. राजीव कुमार, डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. अखिलेश मिश्र, डॉ. निधि वत्स, डॉ. मिर्ज़ा रूहुल्लाह बेग, डॉ. उदय कुमार, डॉ. शुभ्रा, डॉ. जय शंकर सिंह, डॉ. रेशमा तबस्सुम, कुमार सत्यम थे।

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