
महाराष्ट्र में गैर मराठियों पर हमले को लेकर दरभंगा चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने जताई गहरी चिंता, सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल।
दरभंगा: महाराष्ट्र में गैर मराठी भाषियों, विशेषकर बिहार से गए लोगों के साथ हो रही मारपीट और हिंसक घटनाओं को लेकर दरभंगा चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने गहरी चिंता जताई है। चैम्बर के संरक्षक अजय कुमार पोद्दार, अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका, प्रधान सचिव सुशील कुमार जैन, उपाध्यक्ष कृष्णदेव साह, सचिव अभिषेक चौधरी, कोषाध्यक्ष मुकेश खेतान सहित अन्य पदाधिकारियों ने एक बैठक कर संयुक्त बयान जारी किया।

बैठक में कहा गया कि महाराष्ट्र में इन दिनों एक अमानवीय और विभाजनकारी आंदोलन चल रहा है, जिसमें महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता गैर मराठी बोलने वालों को निशाना बना रहे हैं। मॉल, दुकान, घर या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर जाकर जबरन मराठी भाषा में बात करने का दबाव बनाया जा रहा है। मराठी न जानने पर लोगों को जानवरों की तरह पीटा जा रहा है।

संस्था ने इस कृत्य को संविधान और भारत की एकता पर सीधा प्रहार बताया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान हर नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में बसने और कार्य करने की आज़ादी देता है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक बाहरी श्रमिक बिहार से हैं, और अशिक्षित मजदूर वर्ग सबसे अधिक इस हिंसा का शिकार हो रहा है।

चैम्बर ने महाराष्ट्र, बिहार और केंद्र सरकार की चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन बताया। उन्होंने कहा कि एक महीने से जारी इस हिंसा पर न तो महाराष्ट्र सरकार, न ही बिहार सरकार और न ही केंद्र सरकार ने कोई ठोस प्रतिक्रिया दी है। सभी राजनीतिक दल केवल बयानबाजी और राजनीति चमकाने में लगे हैं।

पदाधिकारियों ने कहा कि जब किसी राज्य में डबल इंजन की सरकार होती है तो सत्ताधारी दल उसकी ताकत गिनाता नहीं थकता। लेकिन महाराष्ट्र में तो ट्रिपल इंजन की सरकार है—जहां राज्य, केंद्र और बिहार तीनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है। इसके बावजूद प्रवासी बिहारी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
चैम्बर ने सरकार से मांग की कि महाराष्ट्र में रह रहे सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही बिहार के प्रवासी मजदूरों को लेकर विशेष संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता बताई।

