
यूपीएससी परीक्षा में विद्यांशु शेखर ने हासिल किया 59वां रैंक, लगातार तीसरी बार हुआ सिलेक्शन।
दरभंगा: सिंहवाड़ा प्रखंड के भवानीपुर गांव निवासी विद्यांशु शेखर झा ने यूपीएससी परीक्षा में 59वाँ रैंक हासिल किया है।

विद्यांशु इससे पहले भी तीन बार यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके हैं। 2022 में उनका चयन केंद्र शासित प्रदेश कैडर में हुआ था। 2023 में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के लिए चुने गए। वर्तमान में देहरादून में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस बीच उन्होंने फिर से परीक्षा दी और 2024 में 59वीं रैंक हासिल की।

विद्यांशु भवानीपुर के रहने वाले सुशील कुमार झा और विद्या झा के बेटे हैं। पिता झारखंड में एनजीओ चलाते हैं, जो आदिवासी समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करता है। विद्यांशु की बहन जोधपुर एम्स से एमबीबीएस कर चुकी हैं और अब अमेरिका में एमडी कर रही हैं।

विद्यांशु ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा DAV बरियातू झारखंड से की। इसके बाद VIT वेल्लोर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वहां भी अपने बैच के टॉपर रहे। 2018 में दिल्ली में कुछ महीने कोचिंग की, फिर सेल्फ स्टडी से तैयारी की। मां के साथ दिल्ली में रहकर पढ़ाई की। तीन बार प्रीलिम्स में असफल हुए, लेकिन हार नहीं मानी।

उन्होंने बताया कि वेल्लोर में पढ़ाई के दौरान अमोल श्रीवास्तव उनके मार्गदर्शक बने। अमोल 2019 में यूपीएससी पास कर जिलाधिकारी बने। संयोग से विद्यांशु भी अब उसी जिले में एसडीएम बनेंगे। दोनों के बीच भाई-भाई जैसा रिश्ता है।

विद्यांशु ने कहा कि बिहार और दरभंगा के लोग मेहनती होते हैं। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मैसेज देते हुए कहा कि उन्हें वही क्षेत्र चुनना चाहिए, जिसमें उनकी रुचि हो। उन्होंने बताया कि उन्हें स्कूल समय से ही डिफेंस, इकोनॉमिक्स और इंटरनेशनल रिलेशन में रुचि थी। इंटरव्यू में उन्होंने अपनी हॉबी इंटरनेशनल मीडिया और डिफेंस पढ़ना बताया। इंटरव्यू बोर्ड में आर्मी अफसर ने उनकी हॉबी देखकर सराहना की।

उन्होंने कहा कि यूपीएससी का सिलेबस उनकी रुचि से मेल खाता था। डिस्क्रिप्टिव राइटिंग में भी रुचि थी। यही वजह रही कि उन्होंने इसे करियर के रूप में चुना। उन्होंने बताया कि यूपीएससी में मुकाबला दूसरों से नहीं, खुद से होता है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली नगर निगम में असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में काम किया। वहां सरकारी स्कूलों को नजदीक से देखा। भविष्य में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर काम करना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक शिक्षित महिला पूरे परिवार को शिक्षित बनाती है। जाति भेदभाव खत्म कर सभी को समान सम्मान दिलाना उनका लक्ष्य है।

