
रबी फसलों के लिए बढ़ा तापमान बना संकट : वैज्ञानिक।
दरभंगा: सामान्य से अधिक तापमान रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की पैदावार के लिए चुनौती बन गया है। कृषि विज्ञान केंद्र, जाले के प्रक्षेत्र वैज्ञानिक डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए ठंडा और पाले वाला मौसम जरूरी होता है, लेकिन इस वर्ष तापमान में बढ़ोतरी से फसलों की वृद्धि और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में गेहूं की सिंचाई के दौरान यदि तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है तो फसल को नुकसान हो सकता है। गेहूं के लिए 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं, जब दिन का तापमान 30-32 डिग्री और रात का तापमान 15 डिग्री से कम हो, तब ही सिंचाई की आवश्यकता होती है।
डॉ. कुमार ने बताया कि गेहूं के बीज के अंकुरण के लिए आदर्श तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस होता है। 30 डिग्री से अधिक तापमान पर बीज कमजोर हो जाते हैं, दाने सिकुड़ने लगते हैं और पैदावार घट जाती है। अधिक तापमान मिट्टी की नमी कम कर देता है, जिससे सिंचाई की जरूरत बढ़ जाती है। फसल की बेहतर वृद्धि के लिए प्रारंभिक अवस्था में ठंडा और नम मौसम तथा बाद में सूखा और हल्का गर्म मौसम आवश्यक होता है। यदि शुरुआत से ही मौसम गर्म और सूखा रहे तो बीज समयपूर्व पकने लगते हैं, जिससे उत्पादन में कमी आती है।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि उच्च तापमान से बचाव के लिए हल्की सिंचाई करते रहें। पहली सिंचाई बुआई के 20-25 दिन बाद पौधों में 4-6 पत्तियाँ आने पर करनी चाहिए। इसके बाद आवश्यकता अनुसार 4-6 बार तक सिंचाई करें — दूसरी 40-45 दिन पर (फूटान अवस्था), तीसरी 60-65 दिन पर (बालियाँ बनने पर), चौथी 85-90 दिन पर (दाना भरने की अवस्था) और अंतिम दूधिया अवस्था में करें।डॉ. कुमार ने कहा कि फव्वारा सिंचाई की सुविधा वाले किसान दोपहर में तापमान अधिक होने पर आधा घंटा फव्वारे से पानी देकर तापमान नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही 0.2 प्रतिशत म्यूरेट ऑफ पोटाश या पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर दो बार करने से भी फसल को लाभ मिलता है।

