
संस्कृत विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरें और दुर्लभ पांडुलिपियों का दिल्ली में होगा प्रदर्शन।
दरभंगा: अक्टूबर में दिल्ली के लोदी रोड स्थित इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित वार्षिक महोत्सव में संस्कृत विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरें और पुस्तकालय की दुर्लभ पांडुलिपियां प्रदर्शित की जाएंगी। यह महोत्सव 10 से 16 अक्टूबर तक चलेगा।

इस दौरान संस्कृत विश्वविद्यालय की गतिविधियों को देश-दुनिया के लोग करीब से जान सकेंगे। आयोजन की तैयारी शुरू हो चुकी है। बुधवार को आईआईसी के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय से मुलाकात कर महोत्सव की रूपरेखा पर चर्चा की। कुलपति ने इसे गौरव की बात बताया और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। कुलसचिव प्रो ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि इस आयोजन से विद्वान संस्कृत विश्वविद्यालय को गहराई से समझ सकेंगे। साथ ही यहां की धरोहरों से भी परिचित होंगे।

पीआरओ निशिकांत ने बताया कि आईआईसी की टीम ने पुस्तकालय और दरबार हॉल का अवलोकन किया। कुछ पुस्तकें खरीदीं। कुलपति को आईआईसी से संबंधित पुस्तक भेंट की गई। टीम में डॉ. उषा मोक्षी, शुभ्रा टंडन और राजीव शामिल थे। इन्होंने पुस्तकों की सूची ली और महत्वपूर्ण फोटोग्राफी की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, पटना के उपाधीक्षक सुजीत नयन भी मौके पर मौजूद थे।

केंद्रीय पुस्तकालय प्रभारी प्रो दिलीप कुमार झा के नेतृत्व में टीम को संग्रहालय, म्यूजियम, प्रकाशन और दरबार हॉल की कलाकृतियां दिखाई गईं। मौके पर कुलानुशासक डॉ. पुरेंद्र वारिक, सूचना वैज्ञानिक डॉ. नरोत्तम मिश्र, नोडल पदाधिकारी डॉ. रामसेवक झा, डॉ. विभव कुमार झा, अभिमन्यु कुमार सिंह और लक्ष्मी भी उपस्थित थे। आईआईसी कला, संस्कृति और विरासत को मंच देने वाला प्रमुख केंद्र है। यह भारतीय और पश्चिमी संगीत, रंगमंच, लोक कला, चित्रकारी, फोटोग्राफी और प्रदर्शनी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। अनुभव, नवाचार, रचनात्मकता, शिक्षा और मनोरंजन इसके प्रमुख उद्देश्य है।

