
साल भर में 39 बाल श्रमिकों को कराया गया मुक्त : श्रम अधीक्षक।
दरभंगा: समाहरणालय स्थित अम्बेडकर सभागार में बुधवार को बाल श्रम निषेध को लेकर जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता अपर समाहर्ता राजस्व नीरज कुमार दास ने की। यह बैठक जिलाधिकारी राजीव रौशन के निर्देश पर आयोजित की गई।

बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष सीता देवी, श्रम अधीक्षक किशोर कुमार झा, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग नेहा कुमारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। श्रम अधीक्षक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 39 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। इनमें 5 बच्चे दूसरे जिले के थे, जबकि 34 दरभंगा जिले से थे। सभी को नियमानुसार कैश और नॉन कैश सहायता के तहत पुनर्वासित किया गया।

साल 2025 में अब तक 7 बाल श्रमिकों को मुक्त किया गया है। इनका पुनर्वास जारी है। श्रम अधीक्षक ने कहा कि बाल श्रम के साथ मानव तस्करी भी हो रही है। यह सभ्य समाज के लिए कलंक है। इससे मुक्ति के लिए लगातार प्रयास जरूरी है।

अपर समाहर्ता ने कहा कि संविधान में बाल श्रम निषेध के स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके बावजूद यह प्रथा समाज में बनी हुई है। इसे खत्म करने के लिए सभी को संकल्प और प्रतिबद्धता दिखानी होगी।
बैठक में बताया गया कि किसी भी दुकान, प्रतिष्ठान या कल-कारखानों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों से जोखिम वाला कार्य कराना संज्ञेय और दंडनीय अपराध है। पकड़े जाने पर नियोजक को 20 हजार से 50 हजार रुपए तक जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा या दोनों हो सकते हैं। अपराध दोहराने पर 1 से 3 साल तक की सजा हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दोषी नियोजकों को 20 हजार रुपए बाल पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा करना होगा। ऐसा नहीं करने पर सर्टिफिकेट केस दायर कर राशि वसूली जाएगी।
सरकार की कोशिश है कि बिहार को बाल श्रम मुक्त बनाया जाए। किसी भी जगह बाल श्रमिक दिखने पर संबंधित प्रखंड के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, जिले के श्रम अधीक्षक या जिला पदाधिकारी को तुरंत सूचना दें। बाल एवं किशोर श्रम कानूनन संज्ञेय अपराध है।

