
सिर्फ 16 की उम्र में दरभंगा के वैभव झा बने कवि, प्रकाशित की पहली काव्य पुस्तक।
दरभंगा: मिथिलांचल की धरती हमेशा से प्रतिभाओं की जननी रही है। इसी कड़ी में दरभंगा के होनहार युवा वैभव कुमार झा ने साहित्य और मॉडलिंग, दोनों ही क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। महज़ 16 वर्ष की उम्र में वैभव ने अपनी पहली कविता-संग्रह पुस्तक “मैं कौन हूँ” प्रकाशित कर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। यह पुस्तक आत्मचिंतन, भावनाओं और जीवन के गहरे प्रश्नों पर आधारित कविताओं का संग्रह है। दरभंगा में इतनी कम उम्र के छात्र द्वारा पुस्तक प्रकाशित करने का यह पहला उदाहरण बताया जा रहा है।

वर्तमान में वैभव दरभंगा के निजी स्कूल में कक्षा दसवीं के छात्र हैं। उनके पिता का नाम सुमन कुमार झा और माता का नाम नीतू देवी है। सफलता का श्रेय वे अपनी माताजी तथा कई प्रेरणादायी व्यक्तित्वों—मनीषा मंजरी, दिव्या चौधरी और ललित नारायण चौधरी—को देते हैं। इसके साथ ही वे अपने पूर्व विद्यालय को भी मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद देते हैं।

साहित्य के साथ-साथ वैभव ने मॉडलिंग के क्षेत्र में भी राज्य का नाम रोशन किया है। उन्होंने “बिहार टैलेंट शो यूनिवर्स इंडिया” में 2nd Runner Up का खिताब जीता और बाद में “एसके यूनिवर्स इंडिया इंटरनेशनल” के मंच पर बिहार का प्रतिनिधित्व किया। कम उम्र में साहित्य और मॉडलिंग दोनों क्षेत्रों में पहचान बनाना उन्हें खास बनाता है।

वैभव का कहन है कि उनकी कविता “मैं कौन हूँ” युवाओं को यह संदेश देती है कि हर इंसान अद्वितीय है और उसे अपने सपनों को जीने का अधिकार है।

सिर्फ 16 वर्ष की उम्र में कवि, लेखक, मॉडल, डांसर और अभिनेता के रूप में अपनी प्रतिभा का परिचय देकर वैभव कुमार झा ने यह साबित कर दिया है कि लगन और आत्मविश्वास से कोई भी उम्र बड़ी उपलब्धियों की राह में बाधा नहीं बन सकती।

