
स्टाइपेंड 20 हजार से 40 हजार करने की मांग, डीएमसीएच के इंटर्न्स की हड़ताल से मरीज बेहाल।
दरभंगा: मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) के इंटर्न डॉक्टर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के कारण डीएमसीएच का आउटडोर विभाग पूरी तरह ठप हो गया, जिससे दूर-दराज से इलाज के लिए आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें मात्र 20 हजार रुपए हर महीने मानदेय मिलता है, जबकि पश्चिम बंगाल में 45 हजार, ओडिशा में 40 हजार और पटना के IGIMS में 30 हजार रुपए दिया जाता है। उन्होंने मांग की है कि स्टाइपेंड को न्यूनतम 40 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए और लगभग डेढ़ महीने से लंबित बकाया भुगतान भी तत्काल दिया जाए।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने सरकार को अंतिम नोटिस भेजते हुए चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 27 अगस्त से काम बंद कर देंगे। चेतावनी के अनुरूप मंगलवार को 2020 बैच के इंटर्न्स ने ओपीडी सेवाएं ठप कर दीं। उन्होंने न्यू सर्जिकल बिल्डिंग ओपीडी एंट्रेंस गेट जाम कर दिया और सेंट्रल पैथोलॉजी क्लिनिक, गायनिक वार्ड ओपीडी, पुराने ओपीडी और सर्जिकल वार्ड ओपीडी पर ताला जड़ दिया।

बेगूसराय की सरिता देवी (36 वर्ष) ने बताया कि सोमवार को जांच करवाई थी और मंगलवार को रिपोर्ट लेने आई थीं, लेकिन बंदी के कारण रिपोर्ट नहीं मिल सका। सिंहवाड़ा के मेही कहार (80 वर्ष) और बिरौल की कैली देवी ने भी इलाज न मिलने की शिकायत की। कई अन्य मरीज बिना इलाज वापस लौट गए।

इंटर्न डॉक्टर डॉ. भवेश ने कहा, “पूरे बिहार में ओपीडी सेवा ठप है। सरकार ने नियम बनाया था कि हर तीन साल पर स्टाइपेंड बढ़ाया जाएगा, लेकिन वह अपने ही नियम भूल जाती है। 2017 बैच के सीनियर्स को भी हड़ताल करनी पड़ी थी, तब जाकर मानदेय बढ़ा। हम लोग 2020 बैच के हैं, दो महीने से ड्यूटी कर चुके हैं, लेकिन अब तक स्टाइपेंड भी नहीं मिला। हमने प्रिंसिपल ऑफिस, सुपरिटेंडेंट और स्वास्थ्य मंत्रालय तक लेटर भेजकर अवगत करा दिया है। जब तक स्टाइपेंड 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार नहीं किया जाता, हड़ताल जारी रहेगी। आश्वासन नहीं, हमें लिखित आदेश चाहिए।”
इसी तरह डॉ. रितेश, डॉ. सर्वोत्तम और डॉ. श्याम नंदन ने संयुक्त रूप से कहा, “हम सरकार को कई बार पत्र भेजकर अवगत करा चुके हैं, लेकिन सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिया, ठोस कदम नहीं उठाया। हमें मजबूरन स्वास्थ्य सेवा बंद करनी पड़ी। वर्तमान में ओपीडी सेवाएं ठप हैं, हालांकि इमरजेंसी सेवा चालू है। अगर सरकार ने अगले तीन-चार दिनों में हमारी मांगें नहीं मानीं तो हमें इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करनी पड़ सकती हैं।”
डॉक्टरों ने कहा कि बिहार सरकार अगर इस मुद्दे पर संवेदनशील नहीं हुई तो स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी। हड़ताल पर बैठे इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ा है। आंदोलनरत इंटर्न्स में डॉ. भवेश कुमार, डॉ. सर्वोत्तम कुमार, डॉ. महताब, डॉ. ज्योति, डॉ. उज्ज्वल शाही, डॉ. मोना शर्मा सहित अन्य शामिल रहे।

