
नगर निगम के उपेक्षा के कारण नारकीय स्थिति में जीने को मजबूर हैं एक अल्पसंख्यक मोहल्ला के लोग। Voice of Darbhanga

इम्तेयाज़ अहमद की रिपोर्ट:
दरभंगा: ये तस्वीर है दरभंगा शहर के वार्ड नंबर 31 के मोहल्ला महेशपट्टी के एक सड़क की, जो मिल्लत कॉलेज और कब्रिस्तान से सटे उत्तर पश्चिम में बसा है, और इस मोहल्ले में दर्जनों मुस्लिम परिवार के मकान हैं जिसमें सैकड़ों लोग रहते हैं।
इस सड़क की हालत देख कर यही लगता है के जैसे यहां पर बारिश हुई हो, मगर ऐसा नहीं है, दर असल ये पानी उसी मोहल्ले के कुछ माकन की नालियों का है, जिसे जानबूझ कर सड़क पर खोल दिया गया है, और ये गन्दा पानी सड़क पर कीचड़ फैलाते हुए कब्रिस्तान के एक हिस्से में भी दाखिल हो जाता है, चूँकि जिन घरों का पानी इस सड़क पर गिराया जाता है वे लोग इस सड़क का इस्तेमाल नहीं करते हैं, मगर शायद उनका जमीर भी मर चुका है कि उनके आंखों के सामने उनके घर का गन्दा पानी सड़क और कब्रिस्तान में दाखिल हो रहा है मगर उनलोगों को कुछ फर्क नहीं पड़ता। ऐसे में इस सड़क से रोज़ गुजरने वाले दर्जनों परिवार की परेशानी बढ़ना तो लाज़मी है ही, साथ ही साथ कब्रिस्तान की भी बेहुरमती हो रही है।
हालात ये हैं के ऐसे में यहां रह रहे लोगों का घर से बाहर निकलना भी दोभर हो चूका है, सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब सुबह सवेरे छोटे छोटे स्कूली बच्चों को इसी कीचड़ भरे गंदे रास्ते से गुज़र कर स्कूल और नमाज़ियों को मस्जिद जाना होता है।
मोहल्ले के लोगों का कहना है के ये मोहल्ला वर्षों से नगर निगम की उपेक्षा का शिकार रहा है, यही वजह है के ये मोहल्ला आज भी कई बुनियादी सहुलातों से महरूम है, इस मोहल्ले के लोग पिछले 13 वर्षों से एक सड़क और नाले के लिए तरस रहे हैं, कई बार नगर निगम से सड़क और नाला बनवाने की गुहार लगाई गई मगर आज तक कोई भी कर्मचारी झाँकने तक नहीं आया, थक हार कर यहाँ के लोगों ने इसी जनवरी माह में ही आपस में चंदा करके करीब 50 हज़ार मूल्य की मिटटी गिरा कर कच्ची सड़क का निर्माण खुद ही करवाया, जबकि यहाँ रह रहे सारे लोग नगर निगम के सभी टैक्स भी चुकाते रहे हैं।
लोगों का कहना है के हमलोगों ने आपसी सहयोग से कच्ची सड़क का निर्माण करवाया ताके हमलोगों को सड़क की समस्या से निजात मिल सके मगर मोहल्ले के ही कुछ लोगों ने इस कच्ची सड़क पर अपने घरों की नालियां खोल कर हमलोगों के मनसूबे पर पानी फेर दिया, नतीजा ये है के हमलोग कल भी परेशान थे और आज भी परेशान ही हैं। ऐसे में दरभंगा जिला इंतेजामिया की जिम्मेदारी बनती है के वह जानता की इस समस्या और कब्रिस्तान की हिफाज़त के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए।

