Home मुख्य दरभंगा के रामाकांत चौधरी को ललित सम्मान। Voice of Darbhanga
मुख्य - February 3, 2017

दरभंगा के रामाकांत चौधरी को ललित सम्मान। Voice of Darbhanga

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दरभंगा: देश के पूर्व रेलमंत्री और मिथिलांचल के सबसे बड़े राजनेता रहे ललित नारायण मिश्र की जयंती राष्ट्रीय राजधानी में धूमधाम से ‘ललित दिवस’ के रूप में मनाया गया और विशिष्ट व्यक्तियों को ललित सम्मान  दिया गया। इस अवसर पर दरभंगा के श्री रामाकांत  चौधरी को भी ललित सम्मान मिला। ललित सम्मान के स्वरूप में श्री चौधरी को मिथिला पाग शॉल, एवं प्रसस्ति पत्र दिया गया। रमाकांत चौधरी ने शुक्रवार को Voice of Darbhanga को फोन पर इसकी जानकारी दी। यह सम्मान श्री चौधरी को उनके पत्रकारिता एवं सामाजिक काम में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिथिलालोक फॉण्डेशन के द्धारा दिया गया है। संस्था की ओर से सम्मान देते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शेफालिका वर्मा एवं डॉ गंगेश गुंजन ने कहा की ललित सम्मान से नवाज़ा जाना किसी के लिए गौरव कि बात है। समारोह में ललित नारायण मिश्र के पौत्र राहुल मिश्र भी पहुंचे. राहुल मिश्र ने कहा कि ललित बाबू के योगदान को मिथिलांचल कभी भूल नहीं सकता। ललित दिवस का आयोजन पूर्वी दिल्ली के पश्चिमी विनोद नगर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद पार्क में किया गया। आयोजक संस्था मिथिलालोक फाउंडेशन के चेयरमैन बीरबल झा ने कहा कि यह सम्मान मिथिलांचल क्षेत्र के विकास के लिए किए गए प्रयासों के लिए दिया गया है। मिथिलांचल के सामाजिक-आर्थिक विकास में इन लोगों ने अहम योगदान दिया है और उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें यह सम्मान देने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था मिथिलांचल के विकास के लिए काम कर रहे लोगों को आगे भी सम्मानित करती रहेगी। मिथिलालोक फॉण्डेशन के चेयरमैन डॉ बीरबल झा ने कहा की  ललित बाबु दूरदर्शी ,ओजस्वी एवं राजनेता थे। सम्पूर्ण मिथिला ही नही बल्कि पुरे देश को उनपर गर्व है।

डॉ बीरबल झा ने कहा कि आज ललित बाबू रहते तो सीता की मिथिला विकसित क्षेत्र होती, देश-विदेश के लोग इस पावन धरती को देखने आते, जहां की मिट्टी से सीता प्रकट हुई थीं। अफसोस कि आज सीता की जन्मभूमि मिथिला 21वीं सदी में भी उपेक्षित है और ससुराल अयोध्या दो धर्मों की रणभूमि बनी हुई है। राम की अयोध्या चुनावी मुद्दा बन जाती है, लेकिन सीता की धरती की ओर किसी पार्टी का ध्यान नहीं है।

मुख्य अतिथि शेफालिका वर्मा ने कहा कि ललित बाबू दूरदर्शी राजनेता थे और उनके मन में मिथिलांचल के प्रति गहरा लगाव था। उन्होंने ललित नारायण मिश्र के साथ साझा किए पलों के बारे में भी बताया. शेफालिका ने कहा कि मेरा समस्त मिथिलावासी से आग्रह है कि वे हर साल 2 फरवरी को ‘ललित दिवस’ मनाएं और मिथिला के आन-बान-शान के लिए काम करें।

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