
किसी उद्धारक की बाट जोह रहा है किरतपुर का प्रखण्ड मुख्यालय। Voice of Darbhanga

दरभंगा: तेईस वर्ष गुजरने के बाद भी किरतपुर प्रखंड कार्यालय को न तो अपनी जमीन मिली और नहीं मकान। कोसी, कमला वलान, तिलयुगा तथा गेंहुवा के कछार में बसे लोगों की चहुमुखी विकास के उदेशय से वर्ष 1994 में बिहार की तत्कालीन सरकार की ओर से सृजित किरतपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय का शिलालेख भी किरतपुर अंचल क्षेत्र में कहीं ढूढने पर भी नहीं मिल रहा है।
इसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने अपने केबिनेट सहयोगी डॉ. महावीर प्रसाद के साथ किया था। पचहत्तर हजार की आबादी को बेहतरीन प्रशासनिक सुविधाओं से लैस कराने के निमित्त नव सृजित किरतपुर प्रखंड की आठ ग्राम पंचायत के 118 गांव पहले घनश्यामपुर प्रखंड अंचल के नियंत्रणाधीन था। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति और प्रशासनिक तानाबाना को मजबूत करने के लिए तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक सह सरकार के कबीना मंत्री महावीर प्रसाद के ऐच्छिक कोष से निर्मित एक समुदायिक भवन में किरतपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय का संचालन भी शुरू हुआ।जिले के उच्च पदस्थ अधिकारियों की आवाजाही से इस इलाके में विकास की किरण जगमगाने लगी। लचर प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण विगत 23 वर्षो की अवधि में किरतपुर प्रखंड अंचल कार्यालय मुखयालय भवन के लिए न तो कहीं जमीन खोजा जा सका और नहीं कहीं कार्यालय सह आवासीय परिसर का निर्माण हुआ।
इसका परिणाम यह हुआ कि सरकार के अभिलेख में पूर्ण दर्जा प्राप्त प्रखंड सह अंचल कार्यालय मुखयालय किरतपुर झगरुआ कैंप कार्यालय किरतपुर मुख्यालय घनशयामपुर के रुप में तब्दील हो गया। 18 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर घनश्यामपुर मुख्यालय अवस्थित कैंप कार्यालय किरतपुर पंहुची नरकटिया भंडरिया गांव निवासी प्रखंड पंचायत समिति सदस्या लीला देवी आक्रोश व्यक्त करती हुई कहती है प्रखंड पंचायत समिति से प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा गया लेकिन कहीं कोई सुनने वाला नहीं। किरतपुर प्रखंड को किरतपुर झगरुआ के धरातल पर उतारने के लिए वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि कमर कस चुके हैं। इधर बिरौल के एसडीएम मो. शफीक कहते हैं किरतपुर प्रखंड अंचल के कार्यालय भवन सह परिसर के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है।

