Home मुख्य ट्रस्ट द्वारा एएनएम की नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का मामला आया सामने। Voice of Darbhanga
मुख्य - February 26, 2017

ट्रस्ट द्वारा एएनएम की नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का मामला आया सामने। Voice of Darbhanga

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दरभंगा। एएनएम की नौकरी दिलाने के नाम पर पांच दर्जन महिलाओं से लाखों रुपये की ठगी करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ितों की शिकायत पर एएसपी दिलनवाज अहमद के नेतृत्व में पुलिस ने छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं सोनकी रोड के धोई चक्की चौक स्थित मां निर्मला मेमोरियल ट्रस्ट कार्यालय को पुलिस ने सील कर दिया। साथ ही कार्यालय से भारी मात्रा में कागजात, बैनर-पोस्टर व अन्य सामग्री को जब्त कर लिया गया। ट्रस्ट के सचिव 65 वर्षीय रामसकल यादव को उसके घर मब्बी ओपी स्थित केतुका गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। वह स्व. विकाउ यादव का पुत्र है। हालांकि, इस फर्जीवाड़ा के खेल में असली खिलाड़ी उसका पुत्र राजेश यादव बताया गया है। वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। हालांकि, पीड़ितों ने ट्रस्ट सचिव रामसकल यादव उनके पुत्र राजेश यादव व सलहा गांव निवासी राजाबाबू यादव सहित पांच लोगों पर ठगी करने का आरोप लगाया है। बताया जाता है कि राजेश यादव पहले अपने गांव में स्कूल खोला। लेकिन, वह ज्यादा दिन नहीं चल पाया । बाद में उसने स्कूल को दूसरे लोगों के हवाले कर अपनी मां निर्मला देवी के नाम से मां निर्मला मेमोरियल ट्रस्ट बनाया। इसमें अपने पिता को सचिव बनाया। अन्य पदाधिकारियों व सदस्यों में परिवार के लोगों का नाम शामिल कर लिया। इसके बाद वह सोनकी रोड स्थित धोई चक्की चौक पर ट्रस्ट का कार्यालय खोल लिया। तय प्लान के अनकुल उसने विभिन्न समाचार पत्रों में 60 एएनएम पदों के लिए नियुक्ति का विज्ञापन निकाला। आवेदन करने वालों से डोनेसन के नाम पर 60-60 हजार रुपये, रजिस्ट्रेशन के लिए 550 रुपये व ड्रेस के नाम पर दो हजार रुपया लेकर सभी को नियुक्ति पत्र ही नहीं दिया बल्कि, अस्पताल में ड्यूटी पर भी तैनात कर दिया। राजेश ने डरहार, अरई, हायाघाट, केवटी आदि कई जगहों पर किराया का मकान लेकर अस्पताल खोल दिया। स्थानीय मुखिया से इसका उदघाटन भी कराया था। हर सेंटर पर चार-चार एएनएम को तैनात कर दिया। नौकरी मिलने की खुशी में सभी पीड़ित महिला दूर-दराज से रोजाना आकर अपना उपस्थिति भी बनाती थी। लेकिन, अस्पताल में न तो डॉक्टर का पता था और न ही दवा का। यह बात सभी को बार-बार खटकता था। लेकिन, हर वार जल्द व्यवस्था कर देने का झूठा आश्वासन देता था। दो माह बाद जब किसी के खाते में वेतन नहीं आया तो सभी को शक हुआ। फोन करने पर मोबाइल ऑफ आने लगा। इसके बाद सभी ठगी के शिकार होने का एहसास हुआ। इसके बाद मोरो गांव के सतीश कुमार ठाकुर, वरूण कुमार चौधरी, पटोरी के राकेश कुमार शर्मा, साकेत ठाकुर, समस्तीपुर के कनौजर के राम सुकेश ठाकुर सहित दर्जन भर लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। एएसपी दिलनवाज अहमद ने बताया कि शेष आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है।

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