Home मुख्य दरभंगा के स्थानीय मुद्दों के अलावा बाकी सभी मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं नगर विधायक! Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - March 5, 2017

दरभंगा के स्थानीय मुद्दों के अलावा बाकी सभी मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं नगर विधायक! Voice of Darbhanga

IMG_20170305_074426

दरभंगा: मंत्री अब्दुल जलील में मुद्दे पर आयोजित भाजपा के धरना में भाजपा के नगर विधायक संजय सरावगी शनिवार को बड़े दिनों बाद किसी मुद्दे पर धरना प्रदर्शन में सक्रिय दिखे। पर यह सक्रियता भी दरभंगा शहर के किसी स्थानीय मुद्दे, बढ़ते अपराध, प्राइवेट अस्पताल एवं स्कूलो की मनमानी आदि जैसे ज्वलन्त मुद्दों पर कभी नही देखी जाती। हाँ, एकबार एक गोली काण्ड के बाद इनकी सक्रियता पुरे शहर को आंदोलनमय कर देने में दिखी थी जब इनके एक स्वजातीय समुदाय के व्यवसायी को गोली लगी थी। वहीँ उसी समय कुछ और लूट एवं हत्या का मामला आया था, पर इनकी सक्रियता कहीं नही दिखी। प्राइवेट हॉस्पिटल के मनमानी एवं लापरवाही से लोगो की जान जाने का मामला भी खूब जोर शोर से शहर में उछला पर विधायक जी के मुह से एक शब्द नही निकला। क्योंकि सब जानते हैं कि उस हॉस्पिटल से जुड़े एक प्रतिनिधि के पिता जो विरोधी दल के हैं, फिर भी विधायक जी से उनके अंतरंग निजी सम्बन्ध हैं। अपने पार्टी के उम्मीदवार को हरवाकर विरोधी दल नेता पुत्र को जितवाने की कथा भी जगजाहिर है। इसी के इनाम के बदले इनकी सीट विरोधी दल के नेता ने इन्हें जिताने में मदद करके की।

विरोधी दल से इनके सम्बन्ध की चर्चा इसलिए जरूरी था क्योंकि बढ़ते अपराध और राजद के खिलाफ इनकी बोलती बंद रहने का कारण स्पष्ट हो सके। और बदले में विरोधी दल के भी किसी नेता द्वारा विधायक जी के ऊपर कभी भूल से भी कोई टिपण्णी नही की जाती है। ऐसा नही है कि इन बातों से दरभंगा भाजपा के नेता अंजान हैं, पर विधायक जी के प्रदेश में बैठे स्वजातीय समुदाय के आका का वरदहस्त होने के कारण इनके विरुद्ध किसी शिकायत पर कोई कारवाई नही हो पाती।

पर दरभंगा भाजपा में अब युवाओं ने इन मुद्दों पर कई बार खुलकर नगर विधायक के प्रति विरोध को जाहिर किया है और मुट्ठीभर की संख्या वाले समुदाय के प्रतिनिधि द्वारा दरभंगा के मैथिलों का शोषण एक प्रमुख मुद्दा बना है। सारे आर्थिक एवं राजनितिक केंद्रों पर दरभंगा में विधायक जी के मुट्ठी पर संख्या वाले स्वजातीय समुदाय का कब्जा और मैथिलों के शोषण के विरुद्ध जब कुछ युवाओं ने शंखनाद किया तो वरीय नेताओ का भी अंदरूनी समर्थन युवाओं के आवाज को मिला। पर इस आवाज के कमजोर होने का कारण खुल कर विरोधी खेमे का सामने नही आना हो रहा है।

Share

Leave a Reply