
उपर से नीचे तक के शराब व्यवसाय के बड़े रैकेट का खुलेगा राज। Voice of Darbhanga

दरभंगा: शनिवार को शराब माफियाओं केलिए काला दिन साबित हुआ और पुलिस केलिए बड़ी सफलता का दिन। बहादुरपुर थाना क्षेत्र के गंज चौक के पास से 24 कार्टन शराब बरामद कियस और फिर पकड़े गए आरोपी के निशानदेही के बाद पुलिस ने अलग-अगल जगहों पर छापेमारी कर कुल 224 कार्टन शराब बरामद की। इस छापेमारी में पुलिस को शराब ही नहीं बल्कि, धंधे में शामिल तमाम लोगों की जानकारी भी मिल गई है। उपर में बैठे लोग कैसे इस धंधा को अंजाम देते हैं इसका पूर्ण खुलासा करने का पुलिस ने दावा किया है। ट्रक से गिरफ्तार किए मुख्य धंधेबाज ने बताया कि वह इस धंधे का सबसे निचले पायदान का व्यक्ति है। असली खिलाड़ी तो दिल्ली में बैठा है। उसने बताया कि उन लोगों से हमारी बातें सिर्फ मोबाइल से होती है। शराब कहां पहुंचानी है इसकी जानकारी मुझे मोबाइल से मिलती है। शराब पहुंचाने के क्रम में इस शराब को कौन रिसीव करेगा इसकी जानकारी भी अगले के द्वारा नहीं दी जाती थी। स्थल पर पहुंचने के बाद अगले को सुरक्षित पहुंच जाने की सूचना मोबाइल से दी जाती थी। इसके बाद वहां अनजान व्यक्ति शराब की खेप लेने के लिए पहुंचते थे। माल अनलोड कर वह कहां ले जाता था इसकी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, उसने बताया कि एक बार मोहम्मदपुर, पिण्डारूछ गांव में माल पहुंचाने का काम किया हूं। इस धंधे को अंजाम देने के लिए रैक प्वाइंट के ट्रक का ज्यादा इस्तेमाल करने की बात कही। कहा कि ट्रक ड्राइवर को मुंहमांगा भाड़ा दिया जाता था। झंझारपुर से दिल्ली मोड़ के लिए लाए जा रही शराब की खेप का भाड़ा दस हजार रुपये में तय हुआ था। शराब की तमाम कार्टन को पलक झपकते अनलोड करने के लिए एक ट्रेंड मजदूर भी साथ होता था। इस काम को रानीपुर गांव के मुकेश चौधरी बेहतर करता था। इस एवज उसे भी मुंहमांगा मजदूरी दी जाती थी। आयुष ने बताया कि रैक प्वाइंट से सीमेंट लोड होने वाले ट्रक का ज्यादा इस्तेमाल होता था। बेनीपट्टी के रौशन कुमार मिश्र का ट्रक रानीपुर गांव निवासी सुरेश चौधरी चलाता था। वह दिन में सीमेंट व रात में शराब ढोने का काम करता था। आयुष ने यह भी बताया कि उसे लदारी गांव के ही गोविंद ठाकुर इस धंधा में शामिल कर लिया। पांच हजार रुपये की जरूरत के कारण उसने यह काम करने का लोभ दिया। इसके बाद इस धंधा में शामिल हो गए। उसने बताया कि इस धंधा में मनोहर चौधरी, अरूण झा, प्रदीप ठाकुर आदि शामिल हैं। हालांकि, ये लोग अभी कहां हैं इसकी जानकारी उसे नहीं है।
किसानों के अनाज के लिए बने गोदाम में शराब के धंधेबाज गोदाम में अनाज की जगह शराब रखा करते थे। गिरफ्तार किए गए लदारी गांव निवासी आयुष झा की निशान देही पर जब मधुबनी जिले के भैरवस्थान थाना क्षेत्र के हैटी वाली गांव के पैक्स गोदाम में जब छापेमारी की गई तो इस बात पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था। बंद गोदाम को देख पुलिस ने इसकी सूचना स्थानीय सीओ को दी गई। इसके बाद उनकी मौजूदगी में ताला को तोड़ा गया। अंदर के ²श्य को देख सभी के होश उड़ गए। गोदाम में अनाज की बोरी की जगह शराब पाई गई। जब एक-एक कर कार्टन की गिनती की गई तो कुल 181 कार्टन शराब बरामद की गई। पूछताछ के दौरान पता चला कि गोदाम की चाभी पैक्स अध्यक्ष अनिल कुमार झा के पास रहती है। इसके बाद पुलिस ने उसकी खोज शुरू कर दी है। हालांकि, भनक मिलते ही वह फरार हो गया।
आयुष के पास से बरामद मोबाइल का पुलिस ने सीडीआर निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है इस से कई कारोबारियों का नाम व ठिकाना उजागर होगा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि किस-किस लोकेशन में शराब की खेप पहुंचाई गई है। आयुष के मोबाइल का नेटवर्क जिन क्षेत्रों से प्राप्त होगा उन जगहों पर भी विशेष रूप से छापेमारी की जाएगी।
गोदाम के अंदर शराब की 181 कार्टन रखने वाले पैक्स अध्यक्ष अनिल कुमार झा की अगर गिरफ्तारी हो जाती है तो पुलिस को बड़ी सफलता मिलेगी। बताया जाता है कि राजनीति की आड़ में वह इस धंधा को अंजाम देता था। दिल्ली व हरियाणा में बैठें लोगों से उसका गहरा तालुक्कात है। अगर वह पकड़ा जाता है तो उसके उपर वाले कई लोगों की गिरफ्तारी सरल ढंग से हो जाएगी।

