Home मुख्य तो क्या पूछताछ के नाम पर बिना अरेस्टिंग मेमो किसी को भी हाजत में बन्द कर सकती है पुलिस?Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - April 13, 2017

तो क्या पूछताछ के नाम पर बिना अरेस्टिंग मेमो किसी को भी हाजत में बन्द कर सकती है पुलिस?Voice of Darbhanga

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दरभंगा: यूँ तो पुलिस की वर्दी को देखकर लोगो को अपना सहयोगी की नही, डराने वाली की छवि ज्यादा दिखती है। इस मिथक को बढ़ाने में कुछ पुलिस की कारगुजारियां और चार चाँद लगाती है। ताजा सामने आये मामले में बहादुरपुर थाना की पुलिस द्वारा पकड़े गये तीन युवकों के आरोप यदि सही हैं तो निश्चित रूप से यह पुलिस की बिगड़ती छवि को और बिगाड़ने में सहायक सिद्ध होता प्रतीत होता है। गुरूवार को मीडिया के सूत्रों को तीन युवकों को पुलिस द्वारा देर रात पकड़ कर हाजत में बन्द होने की सूचना मिली। मीडिया के पास खबर पहुँचने की सूचना थाना को पहुँची तो वहां मौजूद पुलिस कर्मी द्वारा शायद हाजत में बन्द तीनो कैदियों को बाहर निकाल कर बैठाया गया। कबीरचक निवासी कमलेश यादव एवं राजू यादव ने मीडिया प्रतिनिधि को कैमरे के सामने बताया कि रात के एक बजे पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उनसे कहा गया कि उनकी बाइक चोरी की है। इसपर उन्होंने सारा पेपर चेक कर लेने को कहा। पर पुलिस उन्हें थाने ले आयी और लप्पड़ थप्पड़ मारते हुए हाजत में बन्द कर दिया। उन्हें बताया गया कि सुबह डीटीओ ऑफिस से ओनर बुक का वेरिफिकेशन कराया जायेगा। करीब दिन के 12 बजे उन्हें हाजत से बाहर निकाला गया। एक अन्य युवक सैदनगर निवासी नन्दन कुमार ने बताया कि वह सैदनगर से बलभद्रपुर अपने मित्र के यहां जा रहा था। पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया थाने लाकर हाजत में बन्द कर दिया। इस मामले में जब वहां मौजूद एक पुलिस कर्मी से बात की गयी तो बड़ा बाबू के मीटिंग में होने की बात बोलकर कुछ भी बताने से इंकार कर दिया गया। युवकों ने बताया कि रात से लेकर दिन के एक बजे तक मात्र एक समोसा ही उन्हें खाने को मिला और सत्यापन के नाम पर उन्हें बैठाया हुआ है। शाम के करीब चार बजे जब थानाध्यक्ष राज नारायण सिंह से इस बाबत वॉइस दरभंगा द्वारा जानकारी ली गयी कि रात से किस मामले में इन युवकों को अभी तक पकड़ कर रखा गया है तो उन्होंने कहा कि कोई मामला नही है। बस सत्यापन केलिए रखा गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह पुलिस का रूटीन वर्क है। पुलिस को अधिकार है कि यदि वह किसी को संदेहास्पद स्थिति में देखे तो उसके इतिहास भूगोल की जानकारी ले सके।

इस बाबत जब मानवाधिकार सह आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र भगत से संपर्क करके इसतरह के मामलो में मानवाधिकार हनन होने के संबंध में जानकारी लिया गया तो उन्होंने पुलिस के इसतरह के व्यवहार को गैरकानूनी बताया। उन्होंने बताया कि यदि पुलिस को किसी से शक के आधार पर केवल पुछताछ करनी है तो वहीँ ओन्सपोट करे। यदि थाने लाती है तो पहले वहां अरेस्टिंग मेमो लिख कर देना होगा कि शक के आधार पर पूछताछ केलिए पुलिस ले जा रही है। उक्त व्यक्ति को अपने परिजन एवं कानूनी सलाहकार से बात करने का मौका दिया जाना चाहिए। यदि इन प्रक्रियाओं को पूरा करके पुलिस लाती भी है तो किसी को हाजत में बन्द नही कर सकती। पूछताछ के दौरान थाने पर बिठाये गये अवधि में चाय नाश्ता सब देना है।  यदि सत्यापन होने के बाद पुलिस छोड़ती है तो उसे उसी जगह पहुँचाना होगा जहाँ से उसे लाया गया था। श्री भगत ने कहा कि यदि इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा किसी निर्दोष को प्रताड़ित किया जाता है तो यह निश्चित रूप से जनता के सवैधानिक एवं मानवाधिकारों का हनन है। इसकी शिकायत यदि उनके पास आता है तो वे निश्चित रूप से आवश्यक कारवाई करेंगे।

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