
बेटे के इलाज़ के दौरान दुष्कर्म की शिकार हुई महिला को आज भी है इंसाफ का इंतज़ार। Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
दिल्ली में हुए निर्भया कांड म आरोपितों पर कोर्ट की सख्ती ने जहाँ एक मिसाल पेश की है वहीँ डीएमसीएच में 7 जनवरी 2017 की रात दुष्कर्म की शिकार हुई एक गरीब व अनपढ़ महिला को आज भी इंसाफ का इंतजार है। वह अपने बेटे के इलाज के लिए यहां आई थी। बेहतर इलाज का आश्वासन देकर एक दलाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में आरोपी को तो गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन, पीड़िता को अब भी इंसाफ नहीं मिल पाया है।
पुलिस कोर्ट में स्पीडी ट्रायल के लिए आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। बावजूद आगे की कोई कार्रवाई नहीं की गई। चार माह से पीड़िता इंसाफ के लिए चक्कर काट रही है। मालूम हो कि 26 दिसंबर को समस्तीपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता अपने पुत्र को डीएमसीएच के अार्थोपेडिक विभाग में भर्ती कराया था। दायां पांव टूटने के कारण उसे लंबे दिनों तक अस्पताल में रहने की बात कही गई।
गरीब परिवार होने के कारण उसके पास खर्च करने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं थी। इसका लाभ अस्पताल का दलाल विपिन ने उठाया। बेहतर इलाज करवाने का आश्वासन देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया था कि डीएमसीएच के अवैध कर्मी व बीबीपाकड़ मोहल्ला निवासी वीपिन राय ने उसे मुफ्त में दवा, सूई व ऑपरेशन में लगने वाले सामान मुफ्त देने की बात कह अल्लपट्टी ले गया।
दलाल ने वहां एक कमरे महिला के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह किसी तरह से डीएमसीएच पहुंची। वहां उसने दुष्कर्मी को सजा दिलाने का संकल्प लिया। मामले को कई लोगों ने दबाने की कोशिश की। लेकिन, वह किसी के झांसे में नहीं आई। वह चट्टान की तरह अपने फैसले पर अडिग रही। वह अंतिम क्षण तक उसने दुष्कर्मी के खिलाफ रेप करने का आरोप लगाती रही। घटना की खबर फैलते ही लोगों में आक्रोश फूट पड़ा। आरोपी को पकड़कर लोगों ने जमकर पिटाई कर दी।
हालांकि, बाद में उसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। डीएमसीएच के कई चिकित्सकों ने दुष्कर्मी को ही बचाने की कोशिश की। आनन फानन में पीड़िता के बच्चे के पांव का प्लास्टर कर वार्ड से घर भेजने की तैयारी कर दी। लेकिन, पीड़िता भी दोषी पर कार्रवाई कराने के लिए अंतिम क्षण तक डटी रही। तत्कालीन प्रभारी एसएसपी रामाशंकर राय के आदेश पर तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष सीमा कुमारी ने आरोपित को कब्जे में ले लिया।
तत्कालीन एसएसपी मीनू कुमारी ने पीड़िता को त्वरित इंसाफ देने के लिए आरोपित के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाने का निर्देश दिया था। चार दिनों के अंदर ही कांड का पर्यवेक्षण कर लिया गया। पांचवें दिन कोर्ट में आरोपित के खिलाफ चार्जशीट समर्पित कर दिया गया। पीड़िता सहित लोगों को आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

