Home मुख्य दोस्त की बीबी को पाने की चाहत में कर दी दोस्त की हत्या। Voice of Darbhanga
मुख्य - May 14, 2017

दोस्त की बीबी को पाने की चाहत में कर दी दोस्त की हत्या। Voice of Darbhanga

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दरभंगा: दोस्ती का रिश्ता विश्वास का सबसे बड़ा रिश्ता होता है पर जब प्यार की अंधी हवस सवार होती है तो दोस्त की जान भी दोस्त ही ले सकता है, यह आज एकबार फिर चरितार्थ हुआ। गत 23 अप्रैल को कमतौल थाना क्षेत्र के बरियौल स्थित खनुआ चौर से मिले गड्ढे में बोरी में बन्द मुंबई के एक युवक मिली लाश की गुत्थी आज पुलिस ने सुलझा ली और आज इसका खुलासा एएसपी दिलनवाज अहमद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने किया।

मूल रूप से जाले का रहना वाला बच्चन ठाकुर 10 वर्ष से अधिक से सपरिवार मुंबई में रहता था और ड्राइवर का काम करता था। इसी दौरान कमतौल थाना के बरियौल का रहने वाला लालबाबू शर्मा मुंबई में बच्चन के संपर्क में आया और दोनों में दोस्ती हो गयी। बच्चन के घर लालबाबू का आना जाना हो गया। इसी दौरान एक हत्या के केस में बच्चन जेल चला गया। जेल में रहने के दौरान लालबाबू बच्चन के बीबी के संपर्क में भी आया और उसकी बुरी नजर बच्चन के बीबी पर पड़ गयी। करीब दो महीने बच्चन जब जेल से निकला। उसके बाद लालबाबू ने उसे धंधा करने केलिए दरभंगा आने को कहा। बकौल बच्चन की पत्नी बच्चन गोवा जाने का नाम बोलकर 20 मार्च को मुंबई से निकला। पर वह 22 मार्च दरभंगा पहुँचा जहाँ लालबाबू ने उसे मब्बी स्थित एक लाइन होटल में ठहराया। बीच बीच में बच्चन मुजफ्फरपुर आदि भी जाया करता था। परंतु किसी प्रकार बच्चन को लालबाबू पर शक हो गया कि वह उसकी बीबी पर गलत नजर रखता है। इसे लेकर अपरोक्ष रूप से बच्चन ने आक्रोश भी जाहिर किया था। गत 22 अप्रैल को लालबाबू ने बच्चन को लाइन होटल में ही दारु पिलाया और और अपने दो अन्य साथियों मब्बी थाना के केतुका के रंजन मिश्रा के पुत्र संजीव मिश्रा और सुरेंद्र यादव के पुत्र अमरेंद्र कुमार यादव को पैसे का लालच देकर अपने साथ बच्चन की हत्या केलिए मिलाया। दारु पीने के बाद तीनों उसे खुनवा चौर बाँध पर ले गए। वहां तीनो में मिलकर बच्चन का मुँह बन्द कर गले में रस्सी डाल गला दबा कर हत्या कर दी। फिर उसकी लाश को एक बोरी में पत्थरो के साथ डाल कर पानी में फेंक दिया।

23 अप्रैल को लाश मिलने के बाद पुलिस को एक पहचान पत्र मुंबई के पते का मिला था पर उस पते पर पिछले 5 साल से वह नही रह रहा था। पुलिस को मृतक के पर्स से स्टेट बैंक मब्बी का पर्ची मिला जिसका खाता संख्या सत्यापित करने पर मुंबई का निकला। खाता के डिटेल में एक मोबाइल नम्बर भी था जो मृतक की पत्नी का था। मोबाइल पर संपर्क करने पर मोबाइल बन्द पाया गया। पर मोबाइल डिटेल के आधार पर मृतक के परिजनों का मुंबई के स्थानीय श्रोतों से पता चला और मृतक की पत्नी एवं माँ तथा साढू को दरभंगा बुलाया गया। मृतक की पत्नी ने किसी पर भी शंका होने से इंकार कर दिया। संयोग से एएसपी दिलनवाज अहमद को गुप्त रूप से सूचना मिली कि लालबाबू नामक एक व्यक्ति ने उसी दौरान किसी बाहरी व्यक्ति को दरभंगा में मारने केलिए पचास हज़ार के सुपारी की पेशकश की थी। इसके बाद मृतक के परिजनोंIMG_20170514_185505 से लालबाबू नामक व्यक्ति के उससे जुड़े होने की जानकारी ली गयी तो पता चला कि लालवाबू उसका करीबी दोस्त था। फिर कॉल डिटेल और मोबाइल टावर लोकेशन आदि को खंगालने के बाद बड़ी मशक्कत से लालबाबू का पता चला। पुलिस ने जाल बिछाकर मृतक की पत्नी की तबीयत खराब होने का नाम बोलकर अल्लपट्टी स्थित शांति वर्मा के क्लीनिक पर बुलवाया। पर लालबाबू नही आया। फिर पुलिस ने मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र और मृतक के पत्नी और माँ को ले जाने केलिए भावनात्मक रूप से कहा तो लालबाबू पुलिस के जाल में फंस कर आ गया जिसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिर बाद में पुलिस ने लालबाबू के निशानदेही पर घटना में शामिल दो अन्य युवकों एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल तथा तीन मोबाइल जब्त किए। लालबाबू इतना शातिर था कि उसका एक भी मोबाइल नम्बर सही नाम पते पर नही था। साथ ही बताते चलें कि लालबाबू भी शादीशुदा है और मृतक भी तीन बच्चों का पिता था। इस केस को सुलझाने में पुलिस के तकनीकी सेल की भी अहम भूमिका रही है।

इस घटना के बाद एसएसपी सत्यवीर सिंह के द्वारा एएसपी दिलनवाज अहमद के नेतृत्व में कमतौल थानाध्यक्ष राजकुमार राय एवं मब्बी ओपी अध्यक्ष गौतम कुमार आदि के साथ एक टीम का गठन किया गया था जिसके बाद इस ट्रेसलेस कहे जाने वाले पुलिस केस को सुलझा लिया गया।

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