Home मुख्य कृषि में अवसर उपलब्ध न कराने के कारण युवाओं का हो रहा है मोहभंग। Voice of Darbhanga
मुख्य - May 18, 2017

कृषि में अवसर उपलब्ध न कराने के कारण युवाओं का हो रहा है मोहभंग। Voice of Darbhanga

FB_IMG_1495154233085

दरभंगा: किसी भी राष्ट्र और समाज की उर्जा उसकी युवा शक्ति में समाहित होती है. जो राष्ट्र अपनी युवा शक्ति का बेहतर इस्तेमाल करता है, वह आगे बढ़ता है. ऐसा नहीं कर पाने वाला राष्ट्र तमाम संसाधनों के बावजूद विकास के दौड़ में पिछड़ जाता है. भारतीय कृषि के पिछड़ेपन का एकमात्र कारण है युवाओं का कृषि से मोहभंग होना है.

आजकल के युवाओं ने खेती-बाड़ी से स्वयं को अलग कर लिया है. यहां तक की अधिकांश किसान भी नहीं चाहते कि उनकी अगली पीढ़ी कृषि को पेशा के रूप में अपनाएं. यह बातें डॉ प्रभात दास फाउंडेशन एवं नागेन्द्र झा महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘भारतीय कृषि और युवा’ विषयक संगोष्ठी में लनामिवि के पूर्व कुलपति सह अर्थशास्त्री प्रो़ राजकिशोर झा ने कही. उन्होंने बताया कि उत्पादन में भारतीय कृषि का कोई सानी नहीं है।

परंतु मार्केटिंग में हम पिछड़ जाते है. किसान तन-मन-धन लगाकर खेती करता है. फसल काटकर जब उसे बेचने बाजार जाता है, तो उसे उचित मूल्य प्राप्त नहीं होता. मक्का, गेहूं, जौ आदि हमारे इलाके में उपजता है, परंतु उससे बिस्कुट दिल्ली, कोलकाता आदि से बनकर हमारे बाजारों में बिकता है. कृषि उत्पादन से इसपर आधारित उद्योगों की मांग तो पूरी हो जाती है, पर किसानों को उचित हक नहीं मिलता है. कंपनियां मालामाल पर किसान बेहाल हैं।

अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ ऋषि कुमार झा ने कहा कि बिना कृषि के मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. यही कारण है कि घाटे के बावजूद किसान खेती से मुंह नहीं मोड़ते हैं. युवा वर्ग इसलिए खेती से नहीं जुड़ पाता है, क्योंकि उनकी भी कुछ आकांक्षाएं होती है. वे बेहतर तरीके से जीना चाहते हैं. इसलिए गांव से पलायन कर जाते हैं. युवाओं के पलायन को भी कृषि के जरिए रोका जा सकता है.FB_IMG_1495154226847

कृषि के क्षेत्र में बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना होगा, तभी युवा कृषि को कैरियर के रूप में अपनाएंगे. संचालन डॉ महादेव झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया. इससे पूर्व कॉलेज की छात्राएं शेफाली भारद्वाज, माला कुमारी, गुड़िया कुमारी आदि ने भी अपना विचार रखा. संगोष्ठी में डॉ सतीश कुमार झा, डॉ अशोक कुमार मिश्रा, डॉ आभा मिश्रा, डॉ वीणा मिश्रा, डॉ एसी झा, भगवान कुमार, निर्भय कुमार निराला, आशुतोष सरगम, अनिल सिंह, राजकुमार गणेशन, मनीष आनंद, नवीन कुमार, मोहन साह उपस्थित थे.

Share

Leave a Reply