
“इंपैक्ट ऑफ़ ग्रैफिन ऑन आवर लाइफ” विषय पर सेमिनार का आयोजन। Voice of Darbhanga
दरभंगा: डाॅ. प्रभात दास फाउण्डेशन एवं नागेन्द्र झा महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘‘इंपैक्ट आॅफ ग्रैफीन आॅन आवर लाईफ’’ विषयक नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमे प्रख्यात वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा , लनामिविवि दरभंगा के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह , प्रोफेसर डाॅ अरूण कुमार मिश्रा , डाॅ ऋषि कुमार राय , सहित कई गण्यमान लोग उपस्थित थे। सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रख्यात वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा ने कही की ग्रैफीन दुनिया का सबसे पहला टू डाईमेंशनल पदार्थ है, जो पारदर्शी होने के बावजूद भी स्टील से 300 गुणा अधिक मजबूत होता है। इसकी एक परत की मोटाई एक परमाणु के बराबर होती है। ग्रैफीन विद्युत का तेज संवाहक है। नैनो, इफो, बायो और न्यूरोलाॅजिकल के क्षेत्र में अनुसंधान जारी है और ग्रैफीन इन चारों से संबंधित है। वस्तुतः यह ऐसी टेक्नोलाॅजी है जो मानव समुदाय के लिए अत्यधिक जरूरी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्रैफीन भविष्य में बनने वाले इलेक्ट्रानिक उपकरणों क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। श्री वर्मा ने कहा कि अगर ग्रैफीन का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाय तो तेजस या फिर अन्य विमानों को भी और भी हल्का एवं बेहतर बनाया जा सकता है। ग्रैफीन की मदद से पीने के पानी से 99.9 प्रतिशत आर्सेनिक हटाया जा सकता है। साथ ही इसके जरिए समुद्र के खारे पानी को भी मीठे जल में बदला जा सकता है। मतलब ग्रैफीन के जरिए पूरी दुनिया से पानी की समस्या को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह सुपर मेटेयिल है और इसका प्रयोग सभी क्षेत्रों में किया जा सकता है। मानव जाति के लिए तो यह वरदान साबित हो सकता है। वही मुख्य अतिथि के रूप में लनामिविवि के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने ग्रैफीन मानव जीवन के लिए लाभदायक बताते हुए कहा की अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल में लाया जाता है तो मानव जीव और भी सुगम बन जायेगा। परमाणु की तरह ही सुपर मेटेरियल ग्रैफीन का उपयोग भी सोच समझ कर करना होगा। क्योंकि इसके व्यापक इस्तेमाल से परमाणु उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और इसके जरिए एक से बढ़कर एक विनाशकारी हथियारों का निर्माण संभव है।

