
131 साल बाद मिथिला से विदा हुई छोटी लाइन की ट्रेन, आमान परिवर्तन कार्य आज से। Voice of Darbhanga

दरभंगा : रेलवे के इतिहास में 26 मई 2017 की तिथि अविस्मरणीय हो गयी. उत्तर बिहार (मिथिला क्षेत्र) से मीटर गेज की ट्रेन 131 साल बाद हमेशा के लिए विदा हो गयी. जिस तरह नई पीढ़ी के लिए कोयला इंजन इतिहास की बात बन गयी है, उसी तरह अब छोटी लाइन यानी मीटर गेज (एमजी) की ट्रेन भी कहानी में ही सिमट कर रह जायेगी. शुक्रवार को आधी रात अपने साथ इतिहास को समेटे यह ट्रेन रवाना हो गयी. अब इसकी सिर्फ यादें ही रह जायेंगी.
आनेवाले समय में इस पटरी पर बड़ी रेल लाइन यानी ब्रॉड गेज की ट्रेन दौड़ेगी, जिसकी रफ्तार तो तेज होगी ही, सुविधा की दृष्टि से भी बेहतर होगा. एक तरफ नई ट्रेन के स्वागत को लेकर क्षेत्रवासी जहां उत्साहित हैं, वहीं एमजी ट्रेन के सफर का आनंद फिर से नहीं ले सकने का मलाल भी है.
कम चौड़े रेल पटरी पर छोटी बोगियों वाली इस ट्रेन का सफर एक अलग मजा देता है. धीमी रफ्तार में खुलनेवाली इस गाड़ी को गति पकड़ने में काफी वक्त लगता है. धीमी रफ्तार के बीच प्राकृतिक छटा का पूरा आनंद मिलता है. दूर तक सपाट फैली जमीन की हरियाली आंखों को सुकून देती है.
नीचे जमीन में धंस रही रेल के साथ दायें-बांयें हिलती-डुलती ट्रेन की यात्रा एक अलग मजा देती है. ऐसा लगता मानो किसी झूले पर बैठकर सफर कर रहे हों. बिना पंखा व बिजली की परेशानी इस यात्रा के आनंद को कम नहीं कर पाती. लेकिन अब यह मजा यात्रियों को कभी नहीं मिल सकेगी. पटरी पर सरपट दौड़नेवाली बड़ी रेल लाइन की ट्रेन में यात्रा की अवधि तो जरूर कम हो जायेगी, लेकिन यह आनंद नहीं मिल सकेगा.
शुक्रवार को 52521 अप सवारी गाड़ी जहां यात्रियों को अपनी आखिरी यात्रा का गवाह बनाया, 5522 डाउन पैसेंजर ट्रेन अपने अंतिम सफर को यादगार बनाने के लिए खुशी-खुशी यात्रियों को अपने साथ लेकर रवाना हुई. इसमें सवार यात्री इस पल के गवाह बने. अपनी आंखों से इतिहास बनते देखा.

