
तो क्या मेयर चुनाव में खेड़िया के प्रभुत्व को चौकाने की तैयारी कर चुके हैं आशुतोष! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
नगर निगम चुनाव समाप्त होने के बाद मेयर पद केलिए कवायद शुरू हो चुकी है। विभिन्न प्रत्याशियों के विभिन्न दावे हैं। पर वॉइस ऑफ़ दरभंगा की पड़ताल में अभी तक जो तथ्य सामने आये हैं, उसके मुताबिक पूर्व मेयर ओमप्रकाश खेड़ीया की पत्नी वैजंती खेड़िया अभी तक सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में चर्चित हैं। उनके सामने हल्की फुल्की चर्चाएं मुन्ना खान की पत्नी शबाना खानम एवं मनोज मंडल की भावी पूजा मण्डल की हो रही हैं। पर किसी के पास 3-4 से अधिक पार्षदों का समर्थन नही दिखाई दे रहा है। ऐसे राजनितिक विश्लेषकों द्वारा खेड़ीया की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। पर मौन और चौकाने वाली तैयारी कहीं और भी चल रही है। वार्ड 47 के दस वर्षों तक प्रतिनिधित्व करने वाले युवा पार्षद आशुतोष कुमार की माँ ने इस बार निर्विरोध चयनित होकर निगम के इतिहास को बदल दिया। इसका प्रमुख कारण आशुतोष द्वारा वार्ड 47 में किये गए कार्य और उनकी स्वच्छ छवि को माना जाता है। लगातार इतने वर्षों तक लोकप्रिय रहने के वाबजूद आशुतोष के विरोध में कोई नही है और इनके मृदुल एवं मिलनसार स्वभाव के सभी कायल है। इनसब को देखते हुए शहर के कई प्रमुख बुद्धिजीवियों की इच्छा थी कि आशुतोष की माँ को मेयर पद मिले। कभी भाजपा से संबंद्ध रहे आशुतोष का किसी दल के लोगों से विरोध नही है। अतः कुछ बुद्धिजीवियों ने इनसे मेयर की दावेदारी करने का आग्रह किया। धनबल के आगे इस लड़ाई में पड़ने से पहले तो आशुतोष ने इंकार किया। पर बुद्धिजीवियों के पहल पर बिना पैसा लिए कुछ पार्षद इनके साथ आये। उन्ही पार्षदों के आह्वान पर फिलहाल अन्य 12 पार्षद का समर्थन इन्हें पूरी मजबूती से मिल चुका है। कुछ राजनितिक हस्तियाँ भी पार्टी लाइन से हटकर इनकी आंतरिक मदद कर रही हैं। संभवतः सोमवार को आशुतोष के समर्थन में 4-5 और पार्षदों को गोलबंद करने केलिए एक गुप्त मीटिंग भी आयोजित हो रही है। कुछ पार्षद खेड़िया को पार्टी लाइन या व्यक्तिगत सम्बन्ध के आधार पर समर्थन का वादा तो कर रहे हैं, पर आशुतोष के पक्ष में स्वाभिमान के साथ काम करने की इच्छा भी पाले हुए हैं और अंतिम समय में पाला बदल कर आशुतोष के पक्ष में अपना मतदान कर सकते हैं। मेयर की दावेदारी करने का दावा करने वाले अन्य तीन प्रमुख खेमो को भी आशुतोष के खेमे में गोलबंद किये जाने का प्रयास चल रहा है जो अंत तक फलीभूत भी हो सकता है। अभी तक पांच अन्य पार्षद खुल कर तथा अन्य सात पार्षद गुप्त रूप से आशुतोष के समर्थन में आ चुके हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक कुछ पार्षद पैसे का खेल होने पर पैसे ज्यादा बांटने वाले उम्मीदवार से पैसा भले ही ले लें, पर अंतिम समय में अपना वोट आशुतोष की माँ को ही मेयर बनाने में ही देंगे। खुल कर सामने नही आने का प्रमुख कारण खेड़िया की ऊँची राजनितिक पहुँच और प्रभाव भी माना जा रहा है। यदि महागठबन्धन के किसी प्रत्याशी द्वारा फिलहाल खेड़िया के समर्थन से इंकार किया जाता है तो उपर से दवाब दिला कर उन्हें अपने पक्ष में मजबूर किया जा सकता है। अतः इसकी तैयारी बिल्कुक गुप्त रूप से की जा रही है ताकि दूसरा पक्ष निश्चिंत रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा के एक पूर्व विधायक का पूर्ण सहयोग के साथ साथ प्रदेश लॉबी का भी हाथ आशुतोष के सर पर होने की बात सामने आयी है। वहीँ सूत्रों के मुताबिक मेयर का दावा ठोकने वाले एक प्रत्याशी पति राविवार को आशुतोष के साथ राजद के एक कद्दावर विधायक के यहां पहुँचे जहाँ उक्त राजद विधायक द्वारा भी मेयर का दावा करने वाले प्रत्याशी द्वारा आशुतोष के समर्थन हेतु राजी कर लिया गया। उनके साथ के दो अन्य पार्षद भी आशुतोष का समर्थन करेंगे, यह आश्वासन उक्त विधायक द्वारा आशुतोष को दिया गया है। नगर विधायक के विरोधी माने जाने भाजपा के पूर्व विधायक द्वारा भी तन मन धन से आशुतोष के समर्थन करने से स्थिति मजबूत हुई है।
कुल मिलाकर कहा जाय तो निगम चुनाव के इतिहास में पहली बार निर्विरोध चयनित हुई आशुतोष की माँ मंजू देवी यदि पहली बार पैसा के खेल को ध्वस्त करके मेयर पद काबिज हो जाय तो यह भी अपने आप एक आदर्श उदाहरण होगा। जनप्रतिनिधियों ने जनता के विश्वास के बदौलत जो जगह हासिल की है, यदि पैसे पर बिके बिना सबसे स्वच्छ और निर्विवाद छवि को समर्थन करते हैं तो निश्चित रूप से जनता के बीच भी अपने पार्षदों की छवि सकारत्मक रूप में प्रदर्शित हो सकती है। इसी को लेकर सोशल मीडिया में युवाओं के द्वारा पार्षदों का आह्वान भी शुरू हो चुका है। उनके आह्वान में स्पष्ट रूप से चयनित पार्षदों से पैसे को वोट न करके स्वच्छ छवि को वोट करने की अपील करके उनके जमीर को जगाने का प्रयास किया जा रहा। यदि आधे पार्षदों का ज़मीर भी जाग गया तो दरभंगा नगर निगम के मेयर पद का चुनाव भी एक नया इतिहास गढ़ सकता है और इसबार के चयनित पार्षदों का नाम भी हमेशा केलिए स्वर्णिम इतिहास में शामिल हो जाएगा।

