
शिशिर झा के टीम की पार्टी में सक्रियता नगर विधायक के वर्चस्व के खात्मे का संकेत तो नही! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
दरभंगा शहर में चलाये गये भाजपा महासंपर्क अभियान की तस्वीरो ने आज राजनितिक विश्लेषकों के माथे पर बल लाकर सोचने केलिए मजबूर कर दिया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष एवं महाजनसंपर्क अभियान के तहत गुरुवार को वार्ड नम्बर 22 शिवाजीनगर बूथ संख्या 151 जितुगाछी फुलवारी में बूथ अध्यक्ष गिरिधर गोपाल की अध्यक्षता में चलाया गया। जिसमे मुख्य अतिथि वरिष्ट भाजपाई डॉo शिशिर झा, प्रभाकर झा, मनोज महतो, उदय शर्मा, मुन्ना ठाकुर आकाश आकाश कुमार, मनोज कुमार, अजय साह, केशव झा, रवि साह, सूरज सहनी, चंदन भंडारी सहित कई युवाओं एवं पूर्व में युवा मोर्चा के सदस्य रह चुके भाजपाइयों की टीम शामिल थी।
ज्ञात हो कि चार बार के नगर विधायक संजय सरावागी के द्वारा पार्टी में मनमानी एवं पॉकेट के लोगो को संगठन में जगह दिलवाने का आरोप लगाते हुए खुलेआम विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले शिशिर झा एवं उनकी युवा टीम सदस्य बालेंदु झा, गिरधर गोपाल, उदय शर्मा, मनोज महतो, आकाश कुमार आदि को नगर विधायक के दवाब पर पार्टी के कार्यक्रमो से दूर रखा जाता था। सुशील मोदी का वर्चस्व प्रदेश भाजपा में रहने तक संजय सरावगी का जिला भाजपा में पूरा वर्चस्व रहा और माना जाता था कि उनके मर्जी के बिना जिला भाजपा में पत्ता तक नही हिल सकता है। इस घुटन को पार्टी के कई नेता वर्षो से झेल रहे थे। दबे मुह बोलते भी थे पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का डर दिखा कर चुप करा दिया जाता था। उनका विरोध करने वाले कद्दावर वैश्य नेता और वर्तमान जदयू विधायक अमरनाथी गामी तथा जनसंघ काल से भाजपा के बुनियाद को दरभंगा में मजबूती देने वाले पुराने भाजपाई जगदीश साह तक को पार्टी छोड़नी पड़ी। पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई एवं पूर्व मेयर अजय पासवान को भी नगर विधायक के विरोध के कारण भाजपा में किनारे कर दिया गया। आशुतोष कुमार जो दस साल से वार्ड पार्षद हैं और काम एवं स्वच्छ छवि के कारण तीसरी बार उनकी माँ निर्विरोध पार्षद चुनी गयी और मेयर पद की प्रबल दावेदार भी हैं, उस आशुतोष कुमार को अमरनाथी गामी के जिलाध्यक्ष कार्यकाल में भाजपा क्रीड़ा मंच का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। पर नगर विधायक के मनमानी के विरोध के कारण जब अमरनाथ गामी को जिलाध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा तो आशुतोष को पार्टी से किनारा कर दिया गया। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके उदय शंकर चौधरी भी संजय सरावगी का खुल कर विरोध करने वाले के रूप में जाने जाते हैं और वे भी भाजपा में फिलहाल किनारे पर हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि जब भी किसी भाजपा के कार्यकर्त्ता या नेता ने नगर विधायक के वर्चस्व या मनमर्जी को चुनौती देने की कोशिश की,उन्हें बाहर का रास्ता दिखला दिया गया।
ऐसा माना जाता है कि विरोध को दिल में दबा कर रखे लोगो ने इस लॉबी के मनमर्जी की शिकायत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक की। अमित शाह के आंतरिक सर्वेक्षण में प्रदेश में सुशील मोदी के वर्चस्व के कारण संगठन के कमजोर होने की जानकारी मिली। इसके बाद सुशील मोदी के प्रभाव से बाहर रह सकने वाले नित्यानंद राय को प्रदेश अध्य्क्ष की कमान दी गयी। नित्यानंद राय ने सुशील मोदी और संजय सरावगी द्वारा पॉकेट में संगठन को रखने की प्रथा को समाप्त करने के दिशा में कदम उठाया। इसके तहत बेनीपुर के पूर्व विधायक और संजय सरावगी के विरोधी खेमे के प्रबल नेतृत्वकर्ता गोपालजी ठाकुर को प्रदेश उपाध्यक्ष तथा समस्तीपुर के सुशील चौधरी को प्रदेश महामंत्री बनाया। इन दोनों को दरभंगा एवं मिथिलांचल में भाजपा के कमजोरियों को पता करने एवं दूर करने के उपाय प्रदेश अध्यक्ष को बताने की जिम्मेवारी दी गयी।
माना जा रहा है कि इन्ही के प्रयासों का नतीजा है कि पार्टी के प्रति समर्पित रहे किंतु नगर विधायक के विरोध के कारण किनारे कर दिये गए पुराने भाजपाइयों को पुनः सक्रीय किया जा रहा है और संभवतः प्रदेश नेतृत्व के संकेत पर आज नगर विधायक के विधानसभा क्षेत्र में नगर विधायक के प्रबल विरोधी खेमे के युवाओं द्वारा भाजपा की टोपी लगाकर महासंपर्क अभियान चलाया गया। प्रदेश नेतृत्व का सीधा हस्तक्षेप इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जिलाध्यक्ष का चुनाव प्रदेश अध्य्क्ष के चुनाव से पहले हो चुका था और दरभंगा के जिलाध्य्क्ष के बारे में जग जाहिर है कि वे नगर विधायक के रिमोट कंट्रोल हैं और उनके विरोधियों को कहीं पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल नही कर सकते।
परंतु नये प्रदेश अध्यक्ष के आने के बाद बने इस बार की जिला कमिटी में नगर विधायक की एक नही चली, नगर निगम चुनाव में उनके सारे प्रमुख वरदहस्त हार गए और अब, शिशिर झा एवं टीम की वापसी और वापसी भी इसतरह उनके खुद के विधानसभा में सक्रियता प्रदान करना, कहीं न कहीं नगर विधायक संजय सरावगी के दरभंगा और पार्टी दोनों जगहों में खत्म हो रहे प्रभाव को दर्शाता है। कहीं इस टीम के वापसी के बाद नगर विधायक के विरोध के कारण किनारे किये सभी प्रमुख लोगो को सक्रिय करना शुरू हो जाए और यह संजय सरावगी राजनितिक जीवन के ताबूत की आखरी कील न साबित हो।

