
25 पार्षदों के हस्ताक्षर वाला आवेदन आठ दिन बाद सार्वजनिक करना कहीं राजनीतिक चाल तो नही! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
राजनीति संभावनाओं का खेल है और इस खेल के खिलाड़ी आखरी समय तक कोई भी दांव खेलने से नही चूकते। दरभंगा नगर निगम के मेयर पद को लेकर हो रही रस्साकस्सी में इसबार महागठबन्धन का पलड़ा भारी है और पूर्व मेयर ओमप्रकाश खेड़िया की पत्नी वैजंती खेड़िया की दावेदारी सबसे प्रबल है। पर एनडीए खेमे में कई दावेदार अभीतक सामने आये हैं पर एकमत होते नही दिख रहे हैं।
इसी बीच शनिवार को चार पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिजरी को 25 पार्षदों के हस्ताक्षर वाला एक आवेदन सौंपा गया है जिसमे खुले मैदान में इसबार शपथग्रहण की मांग की गयी है। इस आवेदन के बाद शहर की राजनीति में एक नयी सरगर्मी आ गयी है। कुछ पार्षदों का कहना है यह आवेदन 23 मई के परिणाम के ठीक बाद 26 मई को हुए पार्षदों के प्रथम मिलन समारोह के दौरान एक पार्षद पति द्वारा लिख कर लाया गया और सबसे हस्ताक्षर ले लिया गया। उस समय पार्षद नये जीत कर आये थे और मेयर की राजनीति शुरू भी नही हुई थी। अगर आवेदन उस समय तैयार करके हस्ताक्षर लिया गया तो उसी समय क्यों नही जिलाधिकारी को दे दिया गया। एक सप्ताह बाद देना निश्चित रूप से संदेह उतपन्न करता है क्योंकि प्रतिनिधिमंडल में सिर्फ चार लोग थे और बाकी कोई नही थे। अभी सभी दावेदारों द्वारा किसी भी प्रकार से अपने साथ ज्यादा से ज्यादा पार्षदों के संपर्क में होने की बात दिखाने की कोशिश की जा रही है। एक पार्षद ने बताया कि जिस पार्षद पति ने यह आवेदन तैयार किया था, वे अपनी पत्नी की भी मेयर केलिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में इस समय यह आवेदन देना पार्षदों को प्रभावित करने का प्रयास भी हो सकता है। हो सकता है उनके द्वारा ज्यादा से ज्यादा पार्षदों के उनके संपर्क में दिखाने की कोशिश हो। अगर आवेदन इतने दिन बाद दिया गया है तो फिर से सबके हस्ताक्षर लिए जाते।
बहरहाल, राजनीति में दांव पेंच सब आजमाना कोई बात नही। हो सकता है कि यह सामान्य बात हो और कुछ ख़ास मकसद के तहत देर न करके चुनाव नजदीक आने पर दिया गया हो। पर इस विलम्ब और मात्र चार पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल मिलना तथा आवेदन को तैयार करने वाले पार्षद पति का अपनी पत्नी को मेयर की दावेदार बताने के बाद विलम्ब से सौपना, कहीं न कहीं सवाल जरूर खड़ा करता है।

