
स्वच्छता एवं पर्यावरण पर एलएनएमयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी। Voice of Darbhanga
दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय में आयोजित स्वच्छा एवं पर्यावरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.के सिंह ने किया. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. पी.आर त्रिवेदी ने कहा कि पर्यावरण एक विषय है जिसके बारे में पहले लोग नहीं जानते थे, आज ये जीवन के लिए आवश्यक हो गया ह. हमें कचड़ा प्रबंधन करने की आवश्यकता है. कचड़ा प्रबंधन से आने वाले दिनों में कचड़ों की महत्व काफी बढ़ जाएगी. लोग बाहर खडेÞ होकर कचड़ें के इंतजार में रहेंगे. विषय प्रवेश कराते हुए प्रति-कुलपति प्रो. जयगोपाल ने कहा कि 2050 तक हमारा देश सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा यदि इस पर अभी से काम नहीं किया गया तो घनी आबादी से गंदगी की प्रमुखता हो जाएगी. इस गंदगी की आदतों में सुधार कर ओद्योगिकिकरण के अंधाधुन प्रयोग पर रोक लगा कर जैविक कृषि का बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षित कर गंदगी और पर्यावरण प्रदूषण से बचा जा सकता है. पूर्व कुलपति प्रो. एस. एम. झा ने कहा कि कड़ा दण्ड का प्रावधान कर स्वच्छता एवं पर्यावरण की रक्षा करने का आचरण करने पर विवश किया जा सकता है. विदेशों में जागरूकता कार्यक्रम के साथ कड़े दण्ड का प्रावधान किया गया. जिससे वहां गंदगी और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित किया गया. डॉ. यू. के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता ही स्वस्थता की पहचान है. आजकल कही हरा-भरा क्षेत्र देखने को नहीं मिलता है. इसके लिए हम खुद दोषी हैं, हमें अपने आप को बदलना होगा, कचरों का प्रबंधन करना तथा सोच में परिवर्तन करना होगा तभी ऐसा संभव हो सकता है. डॉ. यू. शर्मा ने कहा कि बच्चों को स्वच्छता एवं पर्यावरण को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए तथा विश्वविद्यालय स्तर पर इसका अलग से विभाग होना चाहिए जहां अध्धयन एवं शोध दोनों को बढ़ाया जा सकें. कुलपति प्रो. एस. के. सिंह ने कहा कि बाह्य स्वचछता से पहले आंतरिक स्वचछता आवश्यक है. आंतरिक स्वच्छता होने पर अपने आप स्वचछता परिलक्षित होने लगती है. उन्होंने मिथिलांचल के विकास के लिए ठोस नीति की आवश्यकता बताया. आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के संगठन सचिव प्रो. नवीन कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय ने तीन प्रस्तावों को पास किया है. संगोष्ठी का संचालन डॉ. रामभरत ठाकुर ने किया, जबकि धन्यावाद ज्ञापन डॉ. के.के साहु ने किया. इस संगोष्ठी में अन्य लोगें के अतिरिक्त डब्ल्यूआईटी के निदेशक डॉ. नेहाल, कुलानुशासक डॉ. अजयनाथ झा, सीसीडीसी डॉ. मुनेश्वर यादव, मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो. रमण झा, अंग्रेजी विभागाध्यक्षा प्रो. अरूणिमा सिन्हा, राजनीतिशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रामदेव राय, कुलसचिव डॉ. मुस्तफा कमाल अंसारी, के.एस. कॉलेज के प्रो. अशोक कुमार सिंह तथा बी.लिस. छात्र/छात्राओं ने भाग लिया.

