
किशोर न्याय अधिनियम को लेकर अधिवक्ताओं ने लिया संकल्प। Voice of Darbhanga
दरभंगा: बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार और यूनिसेफ के तत्वावधान में बाल अधिकार एवं नालसा द्वारा संचालित बाल कल्याणकारी स्कीमों से संदर्भित विषयों पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन रविवार को समाहरणालय स्थित अम्बेडकर सभागार में सम्पन्न हो गई. तीन प्रक्षेत्र से आये 12 जिले के 60 में से 55 पैनल अधिवक्ता प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण लेकर किशोर न्याय अधिनियम का अक्षरश: अनुपालन का प्रतिज्ञान लिया. समापन समारोह को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विनोद कुमार गुप्ता ने कहा कि बच्चे राष्ट्र के भविष्य निमार्ता हैं. भटके किशोरों को मुख्यधारा में लाना हम सबो का पुनित दायित्व है. प्राधिकार का दायित्व है कि एक भी किशोर विधिक ससहायता से वंचित न रहे. सरकार ने विधि विरूद्ध किशोरों को सजा की जगह सुधार वादी दृष्टिकोण अपनाने हेतु किशोर न्याय अधिनियम बनाया है. बालकों को संरक्षण, आचरण में सुधार तथा समय- समय पर कानूनी संशोधन कर वाल अधिकारों का संरक्षण के लिए कानूनी प्रावधान किया है. वहीं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से विधि विरूद्ध किशोरों को निशुल्क विधिक सहायता एवं उनमें चारित्रिक सूचिता लाने हेतु विभिन्न कार्यक्रम तथा प्रतिकर स्कीम चला रही है. समापन समारोह को संबोधित करते हुए किशोर न्याय बोर्ड दरभंगा के प्रधान सदस्य सह न्यायिक दण्डाधिकारी कन्हैयालाल यादव ने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड में पैनल अधिवक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है. बोर्ड ने विधि विरूद्ध किशोरों से संबंधित मामले के त्वरित निष्पादन, से लेकर संशोधित प्रावधानों का उचित लाभ दिलाने में पैनल अधिवक्ताओं की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण है. वाल अधिकारों तथा किशोर अधिनियम बिषयक कार्यशाला के अंतिम दिन स्टेट कॉर्डिनेटर अजय कुमार, यूनिसेफ के विषेशज्ञ मंशूर कादरी , किशोर न्याय बोर्ड दिल्ली के अधिवक्ता आशिष कुमार आदि ने कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को बाल अपराधों में न्याय निर्णय, पुलिस के सहयोग से नि:शुल्क विधिक सहायता, तथा इस कार्य में बच्चों के प्रति प्राधिकार के दायित्वों, बाल संरक्षण कानूनों का उदेश्य, किशोर न्याय अधिनियम 2015 , किशोर न्याय रुल 2016 के साथ साथ विधायका द्वारा संशोधित कानून के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यशाला में किशोर न्याय अधिनियम में वर्णित वाल अधिकार, विधि विरूद्ध किशोरों के साथ पुलिस का व्यवहार गैरकानूनी प्रतिषेद समेत पुलिस द्वारा प्राथमिकी में बच्चों के गलत उम्र प्रविष्टि में सुधार समेत बच्चें के जमानत/ मुक्त कराये जाने के गुर सिखाये गये. बतातें चलें कि प्रशिक्षण कार्यशाला में तीन प्रक्षेत्रों के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, मुजफ्फरपुर, बेतिया , मोतिहारी, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली कूल बबारह जिलों के अधिवक्ताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. कार्यक्रम का समापन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव बिनोद कुमार गुप्ता ने इस कार्यक्रम के लक्ष्य और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए किया.

