
माँ के अंतिम संस्कार में आ रहे बेटे की मौत से मचा कोहराम। Voice of Darbhanga

बहेड़ी : सिरुआ गांव में बुधवार को जवाहर सिंह के परिवार में कोहराम मच गया. श्री सिंह के मां की अर्थी उठने की तैयारी चल ही रही थी. इसी बीच खबर आयी कि छोटे भाई तथा भतीजा की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी. जवाहर सिंह की मां रामपरी देवी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने आ रहे छोटे बेटे नित्यानंद सिंह की कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी. नित्यानंद सिंह के साथ उनके पुत्र अंकुश सिंह एवं चालक रामा महतो की भी मौत घटना स्थल पर ही हो गयी.जबकि कार पर सवार गांव के ही स्व. अनिल सिंह के पुत्र रजनीश सिंह उर्फ बिट्टू इलाजरत है. घटना की जानकारी मिलते ही गांव में कोहराम मच गया. लोग पीड़ित परिवार के घर पर उमड़ आये.
पुत्र का शव आने से पहले मां का किया गया अंतिम संस्कार. 20 जून के पूर्वाहन 105 वर्षीय रामपरी देवी की मृत्यु हो गयी. छोटे पुत्र नित्यानंद सिंह के मुंबई से आने के इंतजार में शव घर में पड़ा था. गांव में जवाहर सिंह एवं हीरा सिंह शव के अंतिम संस्कार के लिए भाई के आने इंतजार कर रहे थे. नित्यानंद सिंह को लाने के लिए उनके छोटे बेटे अंकुश एवं रजनीश कार से निकले. पड़ोस में विवाह समारोह में आया एक चालक रमा महतो कार चला कर ले गया था. वह सोनपुर का रहने वाला बताया जाता है. अंकुश ने पिता को मुजफ्फरपुर एनएच पर रिसीव किया तथा घर लौट रहा था. इसी बीच पिकअप की ठोकर से कार क्षतिग्रस्त हो गयी. कार दुर्घटना में जवाहर सिंह के छोटे भाई नित्यानंद सिंह व भतीजे अंकुश की मौत की खबर सुन मां के मातम में शामिल लोगों का कलेजा दहल उठा. गांव में मातमी सन्नाटा छा गया. लोगों ने दोनों शव के पहुंचने से पूर्व ही रामपरी देवी का अंतिम संस्कार कर दिया. देर शाम दोनों शव के गांव में पहुंचते ही चित्कार से माहौल गमगीन हो गया.
पत्नी की पहले ही हो चुकी है मौत. नित्यानंद सिंह की पत्नी के मौत पहले ही हो चुकी थी. मां रामपरी देवी वर्षों से उनके बड़े पुत्र विकास एवं अंकुश के अलावे पुत्री निशा की परवरिश कर रही थी. नित्यानंद मुम्बई में ड्राइवरी कर परिवार के भरण-पोषण के साथ तीनों बच्चो की पढ़ाई- लिखाई की व्यवस्था कर रहे थे. अब नित्यानंद के परिवार में उनके प्रथम पुत्र विकास के ऊपर पुत्री निशा की जबावदेही आ गयी है. विकास नागपुर में पढ़ाई करता है. नित्यानंद सिंह को उनका भतीजा हरिशंकर मुखाग्नि देगा. वहीं अंकुश को पड़ोसी मुखाग्नि देने की तैयारी देर शाम तक चल रही थी.

