
नये मेयर के पास भी जलजमाव एवं यातायात की समस्या को दूर करने का नही है कोई रोडमैप? Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
दरभंगा नगर निगम को अक्सर लोग बोलचाल की भाषा में नरक निगम कह कर बदइंतजामी के प्रति गुस्से का इजहार करते रहे हैं। राजनितिक समीकरण बदले तो निगम की सत्ता भी बदली और नए मेयर वैजंती खेड़िया पहली महिला मेयर बनी। पूर्व मेयर गौड़ी पासवान के बारे में जगजाहिर था कि वे नगर विधायक संजय सरावगी के रबड़ स्टाम्प थे और शहर की सत्ता पर विधायक होने के साथ साथ नगर निगम भी पूरी तरह पिछले दस सालों में नगर विधायक के कब्जे में था। बहुत सारे नाले सफाई न होने के कारण जल अधिग्रहण नही कर पाते थे जिससे बरसात का पानी शहर से निकलने में लम्बा समय लगता था। बहुत से ऐसे मोहल्ले भी हैं जिनसे जल निकासी की कोई व्यवस्था ही नही है और न ही पिछले दस साल में कुछ ख़ास इस ओर कोई ध्यान दिया गया।
परंतु नगर निगम की सत्ता बदलते ही लोगो को उम्मीद जगी कि शायद श्रीमती खेड़िया के 15 साल मेयर रह चुके अनुभवी पति ओमप्रकाश खेड़िया उर्फ़ मिट्ठु खेड़िया के अनूभव का फायदा शहर के जनता को मिलेगा। शहर में बरसात पूर्व नाला की सफाई को योजना का कैलेंडर, जिन मोहल्ले में जल निकासी की व्यवस्था ही नही है और बरसात के समय तीन चार महीने जलजमाव रहता है, जिन गलियों में नाला निर्माण नही है या नालों का मुख्य नालों से मेल नही है होने के कारण जलनिकासी पूरी तरह नही हो पाता है, लोगो को उम्मीद थी कि श्रीमती खेड़िया के मेयर बनते ही इनसे निबटने की कार्ययोजना समय सीमा के साथ जनता के सामने पेश किया जाएगा। पर सिवाय सब होगा के आश्वासन के अलावा कोई योजना नही है।
शहर में जलजमाव के बाद दूसरी बड़ी समस्या है यातायात की। अवैध निर्माण और अतिक्रमणों के कारण शहर में जाम की समस्या बड़ी विकराल रूप ले चुकी है। बिना पार्किंग की व्यवस्था के भी हॉस्पिटल, रेस्ट्रुरेन्ट, मॉल,बैंक आदि तक चल रहे हैं। इनकी सेवा का उपयोग करने वाले व्यक्ति अपने वाहन सड़को पर ही लगाते हैं। कोई पार्किंग की व्यवस्था नही है। जाम में ये भी बाधक बनता है। पारस हॉस्पिटल जैसे बड़े संस्थान भी बिना पार्किंग के व्यवस्था के चल रहे हैं। हाल में वीआईपी रोड में खुले सिटी कार्ट मॉल में भी पार्किंग की व्यवस्था रहते हुए भी गाड़ियां सड़क पर ही लगती है और गार्ड भी नही रोकते है। इस कारण शापिंग केलिए आने वाले वाहनों को सड़क पर ही लगाना पड़ता है जिससे व्यस्तम सड़क पर और जाम की स्थिति उतपन्न हो जाती है। परंतु पारस हॉस्पिटल के एक राजद के कद्दावर नेता से जुड़े होने के कारण मेयर द्वारा हस्तक्षेप की बात सोचनी भी बेमानी होगी। इसके अलावा कई रेस्ट्रोरेंट और बैंक की बिल्डिंगे भी हैं जिनके पास पार्किंग की कोई जगह नही है।
अब देखने वाली बात होगी कि नए मेयर कुछ हिम्मत दिखाते हैं या यूँ ही नगर निगम में आश्वासनों के सहारे और पूर्व मेयर द्वारा किये गए गड़बड़ियों का हवाला देते हुए समय गुजार देते हैं।

