
सरकारी आदेश के वाबजूद डॉक्टर नही लिखते सस्ती जेनेरिक दवाईयां! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
दरभंगा में डीएमसीएच से लेकर पीएचसी तक में दलालों का बोलबाला कायम है। दवा दलालों के कारण मरीज आज भी सस्ती जेनेरिक दवा से वंचित हैं। क्योंकि डॉक्टर ऐसी दवा लिखते ही नहीं हैं। वे ब्रांडेड कंमनी की महंगी दवा लिखते हैं। सरकार सभी डॉक्टरों को मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवा लिखने के आदेश कई बार जारी कर चुके हैं। लेकिन वे सरकार की बातें को अनसुनी कर देते हैं। सरकार ने सात साल पहले मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए डीएमसीएच से लेकर पीएचसी तक जेनेरिक दवा दुकानें खोलीं। दवा दुकानें खोलने के लिए टेंडर भी हुआ, लेकिन स्थानीय दलालों के सामने ज नेरिक दवा दुकानें नहीं खुली। सभी दुकानें बंद हैं।
डीएमसीएच में तीन जेनेरिक दवा दुकानें बनी थीं। ये दुकानें फायर प्रूफ बनाई गई थी। ऐसी दवा दुकानें वर्ष 2008 में गायनिक , मेडिसीन और सर्जिकल भवन के परिसरों में खोली गई थी। इन दुकानों का हाल यह है कि सभी ताले लटके हुए हैं। सर्जिकल भवन की जेनेरिक दवा दुकान को पटना के एक ठेकेदार ने आवंटित कराया था। डॉक्टरों और दवा दलालों के कारण इन दवा दुकानदार को एक साल के बाद ही बोरिया विस्तर समेटकर यहां से भाग जाना पड़ा। दुकानदार ने बताया था कि काफी मिन्नत के बाद भी डॉक्टर जेनेरिक दवा मरीजों को नहीं लिखते थे। उधर दवा दलालों की धमकी से वे परेशान थे। कई डॉकटर कमीशन की बात करते थे। दुकान बंद करने के बाद वह दुकानदार ने एक लिखित आवेदन अधीक्षक कार्यालय को भी दिया था। इसके बाद अन्य दवा दुकानों को कोई भी ठेकेदार आज तक दुकान लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए ।
डॉक्टरों की मनमानी के कारण मरीजों को महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल के दवा भंडार में कई दवाओं के रहने के बावजूद डॉक्टर बाजार की महंगी दवा लिखते हैं। कई मरीजों ने बताया कि कई डॉक्टर कहते हैं कि सरकारी दवाओं से इस रोग का इलाज नहीं होगा। इसलिए बाहर की दवाएं लिखते हैं।

