
तमाम ताम-झाम के वाबजूद बिजली विभाग के दावों की हकीकत खोखली! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
बिजली विभाग ने इस साल राजस्व वसूली में और इजाफा कर लेने का दावा किया है. विभाग ने ग्रामीण इलाकों में स्पाट बिलिंग की गति को तेज करने और डिस्ट्रिब्यूशन लॉस को कम से कम करने की बात कही है.
दरभंगा सर्कल के एसई (सुपरइंटेंडिंग इंजिनीयर) सुनील कुमार दास के अनुसार उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर को रजिस्टर्ड करने से कामकाज में पारदर्शिता आई है.
श्री कुमार के अनुसार एक तरफ रेवेन्यू बढ़ा है तो दूसरी तरफ डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को कम करके 15 फीसदी तक लाया गया है. साल 2016 में स्पाट बिलिंग की शुरूआत हुई. ग्रामीण इलाकों में स्पाट बिलिंग पर फोकस है. अभी विभाग 60 फीसदी उपभोक्ताओं को ही कवर कर रहे हैं. सितंबर तक 80 फीसदी ग्रामीण उपभोक्ताओं को स्पाट बिलिंग की जद में ले आया जाएगा.
जबकि विभाग के उत्साह और दावे के उलट आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं. दरभंगा सर्कल में चार डिविजन हैं. दरभंगा शहर, दरभंगा ग्रामीण, मधुबनी शहर और झंझारपुर डिविजन. दरभंगा शहर डिविजन को छोड़ बाकी तीनो डिविजन में रेवेन्यू पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले कम हो गया है.
साल 2015-16 में दरभंगा शहर में रेवेन्यू लक्ष्य के मुकाबले 91 फीसदी रहा जो साल 2016-17 में बढ़कर 104 फीसदी के पार चला गया. यहां विभाग को मुस्कराने का मौका मिला है.
लेकिन दरभंगा ग्रामीण डिविजन की बात करें तो साल 2015-16 में रेवेन्यू जहां 52.65 फीसदी था वो इस साल यानि 2016-17 में घटकर 49.67 फीसदी हो गया. यही हाल मधुबनी शहरी डिविजन का है. साल 2015-16में रेवेन्यू का आंकड़ा 55.17 फीसदी था जो साल 2016-17 में घट कर 54.50 फीसदी हो गया. उधर झंझारपुर डिविजन में साल 2015-16 में रेवेन्यू की वसूली 46.75 फीसदी थी जो साल 2016-17 में घट कर 38.96 फीसदी पहुंच गई.
उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा बिजली बिल:
दरभंगा शहरी डिविजन में कई इलाके हैं जहां उपभोक्ताओं को तीन महीने से बिल नहीं दिया जा रहा है. एसई स्वीकार करते हैं कि कई जगह समस्याएं आई हैं और उसे दुरूस्त कर लिया जाएगा. सुनील कुमार दास बताते हैं कि अप्रैल महीने में टैरिफ में बदलाव हुआ था. नए टैरिफ को साफ्टवेयर में डाला गया है. इस प्रक्रिया में कई उपभोक्ताओं का लाजिक छूट गया है. उन्होंने कहा कि मई महीने तक बिल नहीं मिलने के संबंध में 6500 शिकायतें आई थी. इनमें से अब करीब 400 मामलों का निष्पादन ही बचा हुआ है.

