
सरकारी घोषणा के बाद भी ठोकरे खाने को विवश है माओवादी द्वारा मारे गये तत्कालीन मुखिया की विधवा। Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
कभी कभी सरकारी तंत्र के अजीबोगरीब कारनामे देखने को मिल जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है बहेड़ी प्रखण्ड के शिवराम निवासी एक बूढ़ी विधवा उर्मिला देवी का। इस महिला के पति सीपीएम के नेता और तत्कालीन मुखिया कुमार कल्याण झा की हत्या माओवादियों द्वारा 4 दिसम्बर 1999 को खेत में कर दी गयी थी जिसका बहेड़ी थाना कांड संख्या 124/99 दर्ज किया गया था। माओवादियों के समर्पण पर मुआवजा नीति पर उनके पुत्र स्वतंत्र कुमार झा ने आरटीआई से मारे गये व्यक्ति के मुआवजा की जानकारी मांगी थी जिसके आलोक में इन्हें सरकार के संयुक्त सचिव कमल नारायण झा का पत्र प्राप्त हुआ जिसका पत्रांक 4339 एवं दिनांक 16/5/2013 था। इस संदर्भ में जानकारी दी गयी कि नक्सली हिंसा में मारे गए व्यक्ति के परिजन को जिकाधिकारी के अनुसंशा पर मुआवजा दिया जाएगा। इस जानकारी के बाद मृतक की पत्नी उर्मिला देवी ने 24-06-13 को जिलाधिकारी को मुआवजे केलिए आवेदन किया जिसे आपदा विभाग में भेज दिया गया जबकि यह प्रावधान नही था। कुछ महीनो तक घूमने के बाद आपदा के गटर में पड़े आवेदन को खोजवा कर उनके पुत्र स्वतंत्र कुमार झा ने एसएसपी को भिजवाया जिसे एसएसपी द्वारा 19-06-2014 को सत्य करार दिया गया। इसके बाद जब वे इसे भिजवाने केलिए जिलाधिकारी के सामान्य शाखा में गये तो पता चला कि कोई आवेदन है ही नही। आवेदन गायब हो गया था।
इसके बाद सारे कागजातों के साथ उर्मिला देवी अपने पुत्र के साथ सवर्ण आयोग के सदस्य नरेंद्र सिंह से मिलकर अपना दुखड़ा सुनाया। श्री सिंह ने प्रधान सचिव को 14/03/16 को अनुशंसा पत्र लिखा पर फिर भी कोई फायदा नही हुआ। इसके बाद थक हार कर उर्मिला देवी सरकार के उप सचिव विमलेश कुमार झा से मिलकर दुखड़ा सुनायी और सारे कागजात दिखायी। उपसचिव श्री झा ने पत्रांक 8306 दिनांक 02/09/16 के माध्यम से जिलाधिकारी को वरीय पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के साथ अनुशंसा पत्र उपलब्ध करवाने को कहा। परंतु जिलाधिकारी कार्यालय के कर्मियों द्वारा इसे नजरअंदाज करने का आरोप उर्मिला देवी द्वारा लगाया जा रहा है। उनके पुत्र ने कहा कि जब कोई कारवाई नही हुई इस संदर्भ में तो उप सचिव श्री झा के कहने पर वे सीनियर डिप्टी मजिस्ट्रेट शंकर शरण ओमनी से मिले। पर श्री ओमिनी ने विधवा लाचार औरत और उनके पुत्र स्वतंत्र कुमार झा के साथ अपमानजनक भाषा का उपयोग किया और स्पष्ट शब्दों में मुआवजा नही मिलने का नाम बोल दिया।
मृतक के पुत्र ने बताया कि उनके पिता जेपी सेनानी भी थे। इसका पत्र भी उनके पास है। पर इसका भी कोई लाभ आजतक नही मिला।
इस दौड़ धूप के बाद मिले अपमान को सुनकर उस लाचार विधवा के दिल पर लगे जख्मो ने उसे बीमार बना दिया और लगातार हॉस्पिटल के चक्कर काटते काटते तीन दिन पहले हॉस्पिटल से घर लौटी हैं। आज जब उनके परिजनों ने वॉयस ऑफ़ दरभंगा पर अपने हायाघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह बिहार विधानसभा प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी द्वारा जम्मू में अमरनाथ यात्रियों की रक्षा करने वाले ड्राइवर को अपने एक माह के वेतन देने की जानकारी मिली तो उन्हें भी मदद की अपेक्षा जागी। अपनी बात को रखने केलिए उन्होंने वॉयस ऑफ़ दरभंगा से संपर्क किया और उन्हें उम्मीद है कि वॉयस ऑफ़ दरभंगा के माध्यम से ख़बर देखकर विधायक श्री गामी भी जरूर उनकी मदद में आगे आएंगे।

