
संख्या में नगण्य किंतु प्रतिनिधित्व में अव्वल मारवाड़ समुदाय का चातुर्य एवं पराक्रम अद्वितीय! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
बिहार की राजनीति के बारे में कहा जाता है यहां की राजनीति में जातिगत समीकरण का बोलबाला रहता है और इसी अनुसार प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है। परंतु इस मिथक को तोड़ कर दरभंगा से लेकर बिहार स्तर तक में व्यापार के साथ राजनीति में भी अपनी चतुर्यता के कारण सबसे साफल समुदाय के रूप में काबिज हैं मारवाड़ समुदाय। पूरे बिहार में इनकी जनसंख्या मुश्किल से 25 से 50 हज़ार के बीच होगी। पर इतनी कम संख्या होने के वाबजूद इनके एमएलए, एमएलसी और राज्यसभा सांसद सहित कुल सात प्रतिनिधि हैं और उपमुख्यमंत्री का पद तक इसी समुदाय के पास राजग गठबन्धन में रहा है। अन्य सभी वर्गों के लोगों केलिए इनका चातुर्य अनुकरणीय है। वैश्य वर्ग की ही बात करें तो अन्य 58 उपजातियों में कोई अन्य वर्ग इतना सफल नही है। ब्राह्मण वर्ग भले स्वयं को बुद्धिजीवी और राजनीति में चतुर्यता का दावा करते हों पर ललित बाबू और जगन्नाथ मिश्रा आदि के बाद अपनी भागीदारी की वापसी नही कर पाए। बुद्धि में तेजी का दावा भूमिहार एवं कायस्थ समाज भी करते हैं, पर राजनीति में आज इस समुदाय के सामने वे भी कहीं नही हैं, बल्कि हाशिए पर हैं। राजपूत भले ही खुद को पराक्रमी समझते हों, पर बिहार राजनीति में उनका भी ह्रास ही हुआ है। मारवाड़ समुदाय एकमात्र ऐसा समुदाय है जो व्यापार में भी अथाह पैसा भी कमाते हैं और राजनीति में भी सबसे सफल हैं वह भी नगण्य जनसंख्या होने के बाद भी। भाजपा से सुशील मोदी स्थानीय निकाय से एमएलसी, अशोक अग्रवाल कटिहार से एमएलसी, विजय खेमका पूर्णिया से एमएलए, संजय सरावगी दरभंगा से एमएलए, राजद से प्रेम गुप्ता राज्यसभा सांसद, जदयू से ललन सर्राफ आदि प्रतिनिधि मारवाड़ समुदाय हैं साथ ही साथ मारवाड़ समुदाय के ही सुशील मोदी ही एनडीए सरकार में लगातार वर्षो से उप मुख्यमन्त्री पद पर भी काबिज हैं।
दरभंगा के परिपेक्ष्य में ही बात करें तो यहां भी इनकी नगण्य जनसँख्या के वाबजूद वर्षो से राजनितिक एवं आर्थिक क्षेत्र में जबरदस्त बोलबाला काबिले तारीफ़ एवं अनुकरणीय है। दरभंगा में ब्राह्मण एवं वैश्य के साथ साथ मुस्लिम एवं यादवों की संख्या में बहुलता है। परंतु सभी राजनितिक दल एवं नगर निगम तक में हमेशा इन्ही का प्रतिनिधित्व रहा है। व्यापार में अथाह कमाई एवं संपत्ति अर्जन के गुण भी सबसे ज्यादा इसी समुदाय ने प्रदर्शित किए हैं।
इस समुदाय की इस सफलता के पीछे कहीं न कहीं कोई न कोई विशेष गुण इनमे छिपा होता है जिसे अन्य वर्गों को भी सीख लेने की जरूरत है। ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थ, राजपूत, यादव, मुस्लिम आदि के साथ साथ वैश्य के अन्य वर्णो के लोगों को भी इनसे सफलता का मंत्र लेने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। इन तथ्यों और उदाहरणों को देखते हुए यह कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि आज के जातिगत समीकरण के दौर में व्यापार के साथ राजनीति में भी नगण्य जनसंख्या के वाबजूद सबसे सफल समुदाय होने का चतुर्यता केवल मारवाड़ समुदाय में ही है।

