
मिथिला के गौरव राज पुस्तकालय पर परिचर्चा का आयोजन। Voice of Darbhanga

दरभंगा : महाराजा कामेश्वर सिंह समाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रामभरत ठाकुर ने आज यहां कहा कि मिथिला की संस्कृति में मैथिली और संस्कृत रचा-बसा है. वे आज ‘मिथिला का गौरव राज पुस्तकालय’ विषय पर परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राज पुस्तकालय सांस्कृतिक राजधानी का गवाह है. जहां मिथिला मैथिली से जुड़े ग्रंथ यहां की विरासत को दर्शाता है. इस अवसर पर पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इसे संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए बजटीय प्रावधान होना चाहिए. साथ ही स्थायी कर्मचारियों का पद का भी सृजन होना चाहिए. साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो महत्वपूर्ण गं्रथों को सुरक्षित रखना कठिन है. रूपकांत झा ने कहा कि विदेशों से आने वाले पक्षियों के अद्भूत हस्त चित्रों को संयोजित कर सुरक्षित रखा गया है. परिचर्चा में रंजीत कुमार महतो, शम्भुनाथ झा, शम्भु दास, रमेश मिश्र, रिता कुमारी, प्रिती श्रीवास्तव, सीधेश्वर पासवान और विनोदानंद ने भी भाग लिया.

