
राज पुस्तकालय संरक्षित हो तो प्राप्त हो सकता है अंतर्राष्ट्रीय दर्जा : कुलपति। Voice of Darbhanga

दरभंगा : 45वें दिवस क उपलक्ष में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय स्थित राज पुस्तकालय में तीन दिवसीय प्रदर्शनी लगाया गया है. प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि राज पुस्तकालय अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकालय के रूप में गिना जा सकता है. बशर्ते की इसकी रख-रखाव की व्यवस्था आधुनिक तकनिक से संरक्षण किया जाय. उन्होंने कहा कि राज दरभंगा से विरासत में यह मिला है. जो मिथिला वासियों के लिए गौरव की बात है. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अगले वर्ष पुस्तकायल का 125वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा. मधेपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. राय ने कहा कि पुस्तकालय में हम और आप अपनी संस्कृति को खोज सकते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का पुस्तकालय हृदय स्थल माना जाता है. वहीं प्रतिकुलपति प्रो. जयगोपाल ने कहा कि राज पुस्तकालय विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि पुस्तकालय की सामग्रियों को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में लाने की जरूरत है. कुल सचिव प्रो. मुस्तफा कमला अंसारी ने कहा कि स्थापना दिवस का शुभारंभ राज पुस्तकालय से होना अपने आप में राज पुस्तकालय के लिए शुभ संकेत है. इस मौके पर सिंडीकेट सदस्य प्रो. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू, विधायक फैयाज अहमद के अलावा प्रो. के.के साहु, प्रो. नवीन कुमार अग्रवाल, प्रो. भवेश्वर सिंह, एस.के राय, विनय कुमार चौधरी, प्रताप नारायण, रजनिश कुमार मिश्र, शम्भुनाथ झा, शम्भु दास, सिद्धेश्वर पासवान, लालबाबू यादव आदि उपस्थित थे. स्वागत भाषण पुस्तकालय निदेशक प्रो. रामभरत ठाकुर और मंच संचालन रूपकांत झा ने किया.

