
समय रहते नालों से बड़े अतिक्रमण हटाने की दिशा में पहल नही करने से फिर डूबा शहर! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
तमाम दावों के वाबजूद दरभंगा शहर एकबार फिर बारिश की पानी में तैरता नजर आ रहा है। हॉस्पिटल, दुकानें, स्कूल, घर सड़क, गली मोहल्ला हर तरह पानी ही पानी का नजारा है। शहर को दो दो डम्पिंग ग्राउंड मिल जाने के वाबजूद वार्ड 22 के जीतूगाछी समेत कई जगहों पर पानी के साथ कचरों को भी उपलाते देखा जा सकता है। पिछले बार हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी महीने भर का समय मिलने पर भी नगर निगम द्वारा नालों पर से बड़े अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नही उठाया गया। नालों की साफ़ सफाई का दावा तो किया गया। पर नालों के चौड़ीकरण एवं जमे हुए गादों को निकालने की दिशा में प्रयास तक नही किया गया। बुद्धिजीवियों का मानना है कि जबतक नालों पर अतिक्रमण करके बने बड़े अतिक्रमणों को हटाकर नालों की चौड़ाई को वास्तविक रूप में लाकर नियमित साफ़ सफाई नही की जायेगी, जलजमाव की समस्या बनी रहेगी। परंतु यहां पूर्व से गड़बड़ी का हवाला वर्षों से देकर के लगातार प्रतिनिधि जिम्मेवारी लेने बचते रहे हैं और बस आरोप प्रत्यारोप चलते रहते हैं। प्रतिनिधियो द्वारा दवाब पड़ने पर रटा रटाया जवाब मिलता है कि सभी शहरो की बारिश में यही हालत होती है। पर स्थानीय बुद्धिजीवी इस तर्क को काटते हुए अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं कि दोषारोपण या बहानेबाजी तब करें जब पहले नालों की जमीन पर बन चुके बड़े बिल्डिंगों को चिन्हित करने के बाद उन्हें तोड़कर नालों को वास्तविक चौड़ाई प्रदान करें और नियमित साफ़ सफाई की व्यवस्था की जाय। पहले से बने नालों को ही वास्तविक रूप दे देने की प्रकिया यदि पूरी कर दी जाती है और नियमित साफ़ सफाई की व्यवस्था हो जाती है तो संभवतः शहर की 80 प्रतिशत जलजमाव की समस्या खत्म हो सकती है। परंतु इसे करने में सबसे बड़ी समस्या है अतिक्रमणकारियों का ऊँची रसूख और राजनितिक पहुँच का होना। जितनी भी प्रमुख बड़ी बिल्डिंगे नालों की जमीन पर बनी है, उनसब का कहीं कहीं नगर निगम और शहर के सत्ता में वर्षों से अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में मजबूत इच्छाशक्ति दिखा कर ही इस कदम को उठाया जा सकता है जिसका वर्षों से घोर अभाव देखा जाता है क्योंकि किसी भी राजनितिक दल द्वारा भी नालों की जमीन पर बने बड़े बिल्डिंगों को तोड़ने केलिए कोई मजबूत आंदोलन नही दिखता है। माना जाता है कि लगभग सभी दल से जुड़े रसूखदारों का हाथ इस कब्जनीति में। ऐसे में तबतक शहर की जनता नेताओं के आरोप प्रत्यारोप की राजनीति की नौटँकी देखने को मजबूर रहेगी और इंद्र देव की कृपा पर ही भरोसा कर सकती है।


