
शहर में मात्र एक लाइसेंसी बूचड़खाना, अन्य अवैध 57 बूचड़खानों को बन्द करने का नोटिस। Voice of Darbhanga
दरभंगा: शहर के अंदर 57 अवैध बूचड़खाना पाए गए हैं। इसका खुलासा नगर निगम की ओर से कराई गई सर्वे के बाद हुई है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करने की घोषणा की है। बताया जाता है कि सभी अवैध बूचड़खाना के संचालकों को निगम ने नोटिस भेजकर तलब किया है। इसके बाद सभी को अवैध कारोबार से दूर रहने को कहा जाएगा। आदेश की अवहेलना करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि अवैध बूचड़खाना संचालन होने से इस बीच काफी संख्याओं में आस्था से जुड़े पशु प्रेमियों में वृद्धि हुई है। इससे जिला प्रशासन व जिला पुलिस परेशान बनी है। कोई बड़ी घटना नहीं घटे इसलिए प्रशासन समय रहते अवैध बूचड़खाना पर कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि नोटिस के बावजूद अगर कारोबार को बंद नहीं किया गया तो बूचड़खाना को सिल कर दिया जाएगा। सर्वे में उर्दू बाजार, राजटोली, युसुफगंज, करमगंज आदि मोहल्ला में अवैध रूप से वधशाला चलाने की बात कही गई है।
छोटे जानवरों का स्लाटर हाउस ध्वस्त :
नगर निगम ने छोटे जानवरों के वध के लिए भी स्लाटर हाउस की व्यवस्था की थी। लहेरियासराय व दरभंगा गुदरी बाजार के स्लाटर हाउस में पहले भैंड़, बकरा-बकरी आदि का वध किया जाता था। लेकिन, लंबे दिनों से यह ध्वस्त है। बताया जाता है कि पहल निगम के चिकित्सक पशुओं के स्वस्थ्य होने का प्रमाण मोहर देकर देते थे। इसके बाद ही उन पशुओं का वध किया जाता था।
कोर्ट के आदेश का उल्लंघन :
शहर में सड़क किनारे छोटे व बड़े पशुओं का वध ही नहीं किया जाता है बल्कि, खुलेआम उसे टांग कर बेचा भी जाता है। आने-जाने वाले लोगों को यह अच्छा नहीं लगता है। सर्वोच्चय न्यायालय के आदेश का पालन न तो वध करने वाले मान रहे हैं और न ही जवाबदेह विभाग नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई ही की जाती है।
सड़कों पर बांधे जाते हैं जानवर :
वध करने के लिए गए पशुओं को सड़क किनारे बांध दी जाती है अथवा सड़क पर विचरण करने के लिए छोड़ दी जाती है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी को सामना करना पड़ता है। यातायात व्यवस्था प्रभावित रहती है। कई पशु लोगों को चोटिल भी कर देते हैं। बावजूद, जवाबदेह विभाग नगर निगम कार्रवाई करने में विफल है। बताया जाता है कि पशुगणना को लेकर निगम के पास कई वर्षों से दस हजार रुपये अवशेष है। लेकिन, गणना की बात तो दूर लावारिस पशुओं को पकड़ने व जुर्माना वसूलने की कोई व्यवस्था नहीं है।
वैध स्लाटर हाउस मात्र एक :
नगर निगम क्षेत्र में मात्र एक वैध स्लाटर हाउस है। वार्ड 32 स्थित महेशपट्टी में निगम की और से लंबे दिनों से स्लाटर हाउस चलाई जा रही है। हर वित्तीय वर्ष में इसकी निविदा होती है। लेकिन, यहां अधिक लोग नहीं पहुंच पाते हैं। इसलिए यहां का धंधा मंदा रहता है। यही कारण है कि हर साल निगम को राजस्व की क्षति होती है। इस वर्ष मो. जहांगीर ने 23 हजार रुपये में निविदा ली है। संवेदक की बात माने तो यहां रोजना औसतन छह लोग ही अपने पशुओं क वध करते हैं। हालांकि, बीफ बेचने वालों वैध दुकानदारों की संख्या 20 है। इनके पास लंबे दिनों से निगम का अनु़ज्ञप्ति है। लेकिन, विगत तीन वर्षों से इन लोगों ने अपनी लाइसेंस को रेनूअल नहीं कराई है। लाइसेंस की आड़ में ये लोग अपनी दुकान में ही पशुओं का वध कर रहे हैं। देखते ही देखते दर्जनों लोग अवैध रूप से खुले में अपनी दुकानें चला रहे हैं।
क्या कहता है एक्ट :
बूचड़खाना चलाने के लिए सरकार ने कई नियम बनाई है । आदेश का अवहेलना अथवा नियम का उलल्घंन करने पर अनुज्ञप्ति रद करने का अधिकार है। केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लाइसेंस एवं पंजीकरण) विनियम 2011 आने के बाद पशु वध के लिए स्लाटर हाउस अनिवार्य कर दिया गया।
– बूचड़खाना में पानी, बिजली या प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
– जानवरों को पानी पीलाने के लिए सफाई करने के लिए अलग-अलग कर्मचारी होना चाहिए।
– खून और बांकी गंदगी नालियों में न बहे इसलिए सोख्ता होना अनिवार्य है।
– कोई भी गर्भवती, दूध देने वाली या 3 महीने से कम उम्र वाले जानवर का वद्ध पूर्णत: प्रतिबंधित है।
– वध होने वाले जानवरों की जांच वेटनरी डॉक्टर करेंगे। सही पाए जाने पर मुहर लगाकर सर्टिफिकेट दिया जाना है। इसके बाद ही जानवर को काटा जा सकता है।

