
दारु के नाम पर एक साथ तीन घरों में घुस कर पुलिस ने मचाया उधम, दहशत में लोग! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
शराबंदी के नाम पर लगता है पुलिस को किसी के घर में घुस कर किसी के भी प्रतिष्ठा और मान मर्यादा से खेलने और दहशत फैलाने का खुला लायसेन्स मिल गया है शायद। और यदि नही कुछ मिला बस इतना कह देते हैं कि सूचना मिली थी दारु होने की। बीती रविवार की रात लहेरियासराय थानाक्षेत्र के पंडासराय स्थित ईदगाह मोहल्ले में मो0 शमीम एवं मो0 शमशेर एवं उनके एक अन्य पडोसी का परिवार इस सदमे से इतना बदहवास था कि घर से बाहर सड़क पर रो रहे थे। घर में जाने की हिम्मत नही कर रहे थे। रात करीब साढ़े सात से आठ के बीच तीन जीप पुलिस फ़ोर्स जिसमें एक जीप महिला थाना की भी थी मोहल्ले में पहुँची। इन घरों में सीधे गाली गलौज करते हुए घुसी। इन्हें कुछ भी पूछने समझने का मौका नही दिया। न ही कोई वारंट दिखाया और न ही कोई केस था। बस गालियाँ देते हुए दारु बेचने का आरोप लगाते हुए कह रहे थे कि दारु कहाँ है। इन सभी घरों का सारा सामान पुलिस ने क्षत विक्षत कर दिया। पर कहीं शराब या कोई आपत्तिजनक सामान नही मिला। इसके बाद भी पुलिस वाले सबको भद्दी भद्दी गालियां देते हुए निकल गए। पुरे मोहल्ले में दहशत का माहौल हो गया था। इन घरों के लोग घरों में जाने से ख़ौफ़ खा रहे थे। महिलायें तो सड़क किनारे फुट फुट कर रो रही थी। किसी के बेटी का रिश्ता होने वाला था तो किसी के मेहमान आये थे।
इस मामले की जानकारी मिलने पर जब लहेरियासराय थानाध्यक्ष आरके शर्मा से बात की गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि गया था पर उन्होंने नही भेजा था, शायद नही कुछ मिला है। डीएसपी साहब ने भेजा होगा। इस पर जब सदर डीएसपी दिलनवाज अहमद से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लहेरियासराय थाना को सूचना मिला होगा तो थाना ने भेजा होगा। उन्होंने नही भेजा।
यह पहला मामला नही है जब इस तरह जाकर पुलिस ने दारु के नाम पर छापेमारी की हो। इससे पूर्व भी कई मौकों पर गुप्त सूचना के नाम पर पुलिस सीधे घरों में जाती रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि किसी ने पुलिस को सूचना दी तो क्या पुलिस को सूचना ठोस नही करनी चाहिए। क्या ऐसे में निजी द्वेष निकालने केलिए और अपने विपक्षी को बदनाम करने केलिए ऐसे तत्वों द्वारा पुलिस का दुरुयोग नही किया जाता रहेगा! अगर इतनी बड़ी गलत सूचना देने वाले पर पुलिस नाम सार्वजनिक कर कारवाई नही करती है तो क्या अपने विपक्षियों को परेशान करवाने केलिए पुलिस एक आसान हथियार नही बन कर जाएगा?

