
युवा और किसान देश की रीढ़ है तो अभीतक इनका कोई अलग आयोग क्यों नही: गंगा यादव। Voice of Darbhanga

दरभंगा: पहले के नेता देश और समाज सबसे पहले देखते थे, फिर पार्टी और तब परिवार। पर आज के नेता ठीक उल्टा करते हैं। उनके लिए सबसे पहले खुद का परिवार महत्पूर्ण होता है, उसके बाद पार्टी और तब कुछ बचा तो देश के लिए सोच लेते हैं।
उपरोक्त बातें रविवार को लहेरियासराय के चट्टी चौक स्थित दुर्गामंदिर प्रांगण में युवा जाप के कार्यजर्ताओं को संबोधित करते हुए जन अधिकार पार्टी के वरिष्ठ नेता गंगा प्रसाद यादव ने कही। उन्होंने सभी पार्टियों को युवाओं और किसानों के मुद्दे पर घेरते हुए जमकर लताड़ा। श्री यादव ने कहा कि देश में सब कहते हैं कि 60% यूथ है, सब यूथ की बात करते हैं। पर यूथ का कोई संगठन नही। युवा आयोग का गठन आजतक क्यों नही। महिला, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, मानवाधिकार, सवर्ण आयोग, दलित आयोग, अल्पसंख्यक कल्याण है। सब कहते हैं कि युवा देश की रीढ़ हैं, युवा के नेता हैं। पर युवाओं की समस्या देखने केलिए आयोग क्यों नही। उसी प्रकार किसान देश का अन्नदाता है। भारत कृषि प्रधान देश है। किसान की समस्याओं के सामाधान केलिए कोई अलग स्व आयोग क्यों नही है। दर्जनों आयोग बन गए। पर युवा और किसान, जो देश की रीढ़ हैं, उनका आयोग क्यों नही बना आजतक।
जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाते हुए श्री यादव ने कहा कि लोग समस्या के समाधान केलिए प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। पर चुनाव के बाद जीत कर मालिक बन जाते हैं। हम मुखिया से लेकर सांसद तक चुनते हैं।
पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव के विषय में बताते हुए कहा कि वे जनता के हित का कार्य करते हैं तो वो भी कोई एहसान नही करते। ये उनका काम है। पर फिर भी वो सब के चहेते बने क्योंकि जो प्रतिनिधि का नैतिक कर्तव्य उसे प्रतिनिधि पुरा नही कर रहे हैं, पर पप्पू यादव उसे पूरा करते हैं और प्रतिनिधि के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
पप्पू यादव जी का प्रतिनिधियों से कहना है कि जब बाढ़ आ गयी, आफत में हैं जनता, तो प्रतिनिधि का कर्तव्य है जाना। जब चुनाव में पांच करोड़ खर्चा करते हैं तो एक करोड़ इसमें भी खर्चा करो। लूट लूट कर स्विस बैंक में सारा पैसा नही जमा करो। मकान खरीदने में ही मत लगाओ। लूटते हो तो कम से कम आपदा के समय तो बांटों।
मनोज चौधरी हत्यकाण्ड पर चर्चा करते हुए श्री यादव ने कहा कि इतने वीभत्स काण्ड में लालू क्यों नही गये, नितीश क्यों नही गये क्योंकि मृतक ब्राह्मण थे, बैकवर्ड वोट कट जाएगा। पप्पू यादव जात की नही,मानवता की राजनीति करते हैं। वे वहाँ गये और पीड़ित परिवार की मदद की। आगे भी उनके परिवार को इन्साफ दिलाने केलिए आरपार की लड़ाई की तैयारी हो रही है। त्योहारों के अवकाश के बाद इसपर त्वरित कार्य होगा।
जाति की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए श्री यादव ने कहा कि जब पांच जाति के लोग एकसाथ कहीं गये और किसी जानवर ने हमला कर दिया तो क्या जाति देखेगा? नही न! परिवार में बच्चे बूढ़े जवान होते हैं। इसमें से अगर कोई नही है, तो परिवार पूरा नही होता है। संगठन में भी जरुरी है। संगठन हर व्यक्ति को मजबूत बनाता है। हर तरह से। परिवार में जहाँ सभी को सम्मान मिलता है, वहाँ पुरे समाज में उस परिवार को अच्छा माना जाता है।
अंग्रेज के समय में राजतंत्र था, पर आज जात तंत्र हो गया है। देश में जरूरत लोकतंत्र की है। जिस देश में लोकतंत्र की जगह जाततंत्र होगा, वहाँ देश का विकास होगा? पर यहां के नेता जाततंत्र का जहर घोलते रहते हैं। और राजनीती करते रहते हैं। आज लालू यादव के बारे में पूरा दुनिया जानता है कि घोटाला किया है। पर जाततंत्र का जहर इतना घोले हुए हैं कि जाततंत्र के बदौलत आज भी बने हुए हैं। नेता जाततंत्र को खत्म नही करके बनाये रखना चाहते हैं ताकि लाख घपला घोटाला या अपराध भी करें तो भी उनकी रणनीति जाततंत्र के बदौलत चलती रहे।
पप्पू यादव इनसब से हटकर एक अलग संगठन का निर्माण करना चाहते हैं। ऐसा संगठन जो इन कुरीतियों को दूर करके समाज को जोड़ने का काम करे। उनका स्पष्ट निर्देश है कि समाज में कहीं किसी के साथ कोई घटना हो तो संगठन के कार्यकर्त्ता तुरन्त सबसे पहले पहुँचे। कार्यकर्त्ता मिलकर उसकी मदद करें। लोगों की मदद करने केलिए संगठन है। वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन करें। जिस मोहल्ले या जिस टोले में हैं, वहीँ लोगो का सहारा बने। कोई बूढ़ा है उसका सहारा बने। बात करें। किसी बीमार की सेवा का समय निकालें। कार्यकर्त्ता ऐसे काम करें कि समाज में सन्देश जाए कि हम बदलना चाहते हैं। समाज को बदलने केलिए हमे खुद में बदलाव लाना होगा। हम बदलेंगे तो समाज भी बदलेगा। बैठक में जाप नेता आशुतोष झा मोनू, मोहन यादव आदि सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

