
बड़ा सवाल: नियमानुकुल वरीयता या राजनितिक चहेते को मिलेगा कॉलेजे के प्राचार्य पद? Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
यूँ तो राजनितिक वर्चस्व का बोलबाला आज हर क्षेत्र में देखने को मिलता है और इसका नतीजा कहीं न कहीं गुणवत्ता की जगह राजनितिक शक्ति की महत्ता के रूप में देखने को मिलता है। शिक्षण संस्थानों में मलाई वाला पद जब हो और शासी निकाय के कर्ता धर्ता जब राजनितिक व्यक्ति हो तो पद पर वरीयता और गुणवत्ता की जगह राजनितिक स्वार्थ सिद्धी को प्राथमिकता मिलती है।
कुछ ऐसा ही नजारा आजकल ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय एक संबद्ध कॉलेज लोहिया चरण सिंह माहाविद्यालय में प्राचार्य में पद को लेकर देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के ज्ञापांक-15/एम 1-20/2017(अंश 1)-1703 दिनांक 20.09.2017 तथा ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय दरभंगा के ज्ञापंक 16784-861/17 दिनांक 06.10.17 के आलोक में महाविद्यालय में प्राधानाचार्य अवकाश ग्रहण कर चुके हैं। इसके बाद विगत दो सप्ताह से अधिक बीत जाने के वावजूद भी अबतक माहाविद्यालय के शासी निकाय द्वारा नये प्राधानाचार्य का बहाली नही किया गया है। वर्तमान में माहाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष बहादुरपुर विधायक भोला यादव हैं तथा सचिव के रूप में अधिवक्ता अंजनी भगत कार्यरत हैं, जबकि विश्विद्यालय प्रतिनिधि के रूप में एमएलएसएम् कॉलेज के प्रध्यापक डॉ0 अजित कुमार चौधरी हैं। हद तो तब हो गयी जब जिला प्रशाशन ने इस अवकास प्राप्त प्रधानाचार्य को सिपाही भर्ती परीक्षा का केंद्राधीक्षक भी बना दिया और इस आशय की जानकारी के वाबजूद शासिनिकाय का मौन व्रत जारी रहा।
कॉलेज सूत्रों की माने तो बिहार कॉलेज सेवा आयोग द्वारा संबद्ध कॉलेज में वरीयता का आधार आयोग द्वारा अनुशंसा तिथि एवं पद सृजन तिथि होता है। इस आधार पर वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 शिव नारायण यादव की वरीयता सबसे ऊपर है। इनका अनुशंसा तिथि 08-04-97 है। इनसे ऊपर उक्त संबद्ध कॉलेज में डेट ऑफ़ कमीशन के हिसाब से किसी की वरीयता नही है। ऐसे में इनको प्राचार्य पद प्राथमिकता के आधार पर आसानी से दिया जा सकता था और प्राचार्य विहीन कॉलेज की व्यवस्था सुचारू हो सकती थी। परंतु शिक्षा जगत में शुरू राजनीति के आलोक में नियमो की अनदेखी कर अपने स्वार्थ सिद्धि एवं चहेते को भी प्राथमिकता दी जा सकती है और इसी प्रयास में मामले को लटकाने का कयास भी कॉलेज से जुड़े हलको में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 अक्टूबर को शासिनिकाय की बैठक निर्धारित की गयी है और इसमें प्राचार्य के पद के संबंध में निर्णय की संभावना जतायी जा रही है। कॉलेग सूत्रों के मुताबिक यदि नियमाकुल वरीयता को आधार बनाया गया तो डा0 शिव नारायण यादव का प्राचार्य बनना तय है। परंतु यदि नियमो की जगह किसी चहेते को प्राथमिकता दी गयी तो कहानी कुछ और भी हो सकती है।

