
ठोप लगाकर पाग चादर पहनाने से नही,बल्कि मैथिलि को रोजगार से जोड़ने पर होगा विकास: विवेकानंद झा। Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
मिथिला और मैथिलि के विकास केलिए मैथिलि भाषा को रोजगार से जोड़ना होगा। केवल भाषण देने से और ठोपा लगाकर पाग चादर पहनाने से मिथिला का विकास नही होगा। केंद्र सरकार ने मैथिलि को अष्टम अनुसूची में जोड़कर इसका मार्ग भी कब का प्रशस्त कर चुकी है। अब यहां के लोगो को इसका लाभ लेना होगा।
उक्त बातें दरभंगा के निवर्तमान उपविकास आयुक्त विवेकानंद झा ने सोमवार को अपने तबादले के बाद वॉयस ऑफ़ दरभंगा से हुई एक्सक्कुसिव बातचीत के दौरान कही। श्री झा ने कहा कि दरभंगा के जैसी धरती पूरे बिहार में नही है। यहां के लोग बहुत ही शांत और सभ्य होते हैं। अपने तीन वर्ष और नौ महीने के कार्यकाल में दिन रात काम करने में उन्हें कोई दिक्कत नही हुई। उनकी शिक्षा दीक्षा भी दरभंगा में ही हुई है। जो अधिकारी यहां नौकरी करने आते हैं, उन्हें दिक्कत हो सकती है, पर वे यहां नौकरी करने केलिए नही, बल्कि सेवा करने के लिए आये। अतः उन्हें यहाँ कोई दिक्कत नही हुई और सबों से पूरा मान सम्मान उन्हें मिला।
मैथिल के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मैथिल का अभिप्राय मिथिला में रहने वाले हर वर्ग और समुदाय से जबतक सामूहिक रूप से नही होगा, शासन पर मैथिलों का अस्तित्व प्रभावकारी नही होगा। श्री झा ने कहा कि केवल भाषण देने से मिथिला का विकास नही होगा। जरूरतमंदों की मदद करने से होगा। कोई बीमार है, किसी को बच्चे को पढ़ाने में मदद की जरूरत आदि है तो उसकी मदद होनी चाहिए, न कि मंच पर खड़ा होकर केवल भाषण।
मैथिलि को रोजगार परक बनाने पर जोर देते हुए श्री झा ने कहा कि इसके लिए यहां के लोगो को सजग होना होगा। यूपीएससी में मैथिलि पढ़ कर लोग कम्प्लीट कर रहे हैं। दूसरे प्रदेश के लोग भी मैथिलि विषय से यूपीएससी और बीपीएससी कम्प्लीट कर रहे हैं। पर यहां के लोग ही मैथिलि विषय की पढ़ाई भी नही करते न अपने बच्चों को करवाते।कुछ उदाहरण पर बोलते हुए श्री झा ने कहा कि मिथिला यूनिवर्सिटी के पीजी में 40 सीट है मैथिलि का तो वहां पांच एडमिशन होता है, कोलकाता यूनिवर्सिटी, बीएचयू आदि में भी मैथिलि की पढ़ाई होती है तो वहाँ छात्र ही नही होते। जब तक यहां के लोग मैथिलि की पढ़ाई नही करेंगे, मैथिलि में शोध नही होगा, मैथिलि रोजगारपरक कैसे बनेगा।
अपने बेबाक अंदाज केलिए परिचित श्री झा ने अपरोक्ष रूप से मिथिला मैथिलि के नाम पर राजनीति करने वालो पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वास्तविक विकास जरूरत मन्द मैथिलों का शिक्षा,स्वास्थ, रोजगार में मदद दिलाने से होगा न कि बड़े बड़े मंचों पर खड़ा होकर केवल भाषण देकर।

