Home मुख्य गिरफ़्तारी वारंट जारी होने की खबर पर थानाध्यक्ष ने कहा, सम्मन मिला ही नही उन्हें कभी। Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - November 8, 2017

गिरफ़्तारी वारंट जारी होने की खबर पर थानाध्यक्ष ने कहा, सम्मन मिला ही नही उन्हें कभी। Voice of Darbhanga

 

दरभंगा: एक आपराधिक मामले में न्यायालय द्वारा सम्मन निर्गत किए जाने के बाद भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे हायाघाट थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष कौशल कुमार के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। मामला हायाघाट थानाक्षेत्र के हथौरी गांव से जुड़ा हुआ है। हथौरी निवासी सीता देवी ने 7 अक्टूबर 16 को थानाक्षेत्र के भरवाड़ी गाँव के निकट घटित घटना को लेकर आरोपित थानाध्यक्ष पर मारपीट व गाली गलौज का आरोप लगाते हुए कोर्ट में नालिसी दर्ज करवाई थी। अदालत में जांच साक्ष्य की गवाही होने के बाद आरोपित के विरुद्ध प्रथम द्रष्टया साक्ष्य पाकर कोर्ट ने 23 फरवरी 16 को आरोपित के विरुद्ध संज्ञान लिया।अदालत से आरोपित की उपस्थिति के लिए इस मामले का विचारण वाद में सम्मन किया गया। बावजूद आरोपित नहीं उपस्थित हुआ।बाध्य होकर चतुर्थ अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दीपक कुमार की कोर्ट ने आरोपी दारोगा के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट निर्गत करने का आदेश पारित किया है।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हायाघाट के तत्कालीन एवं केवंटी के वर्तमान थानाध्यक्ष कौशल कुमार ने बताया कि उन्हें केस होने की जानकारी भी उनके तबादले के बाद अख़बार के माध्यम से मिली थी। इसके बाद वे तत्कालीन जज जिनके अदालत में केस था, उनसे मिलकर उन्हें सारी जानकारी दी थी। उक्त तिथि को दीवाली एवं मोहर्रम को लेकर संयुक्त बैठक जिला में था जिसमे वे उपस्थित थे। केस की जानकारी होने अपने अधिकारिक और निजी दोनों मोबाइल का सीडीआर तक निकलवा कर दिखाया था। मोबाइल का लोकेशन भी उक्त तिथि और समय लहेरियासराय में इंगित कर रहा है। वे उक्त तिथि को उस स्थल पर कभी गये ही नही जहाँ पर उनके द्वारा मारपीट एवं गाली गलौज का आरोप है और यह बात उनके मोबाइल लोकेशन से भी स्पष्ट है। एक पेड़ काटने को लेकर हुए आपसी विवाद में आरोप लगाने वाली महिला का पुत्र जबरन केस ट्रू करने का दवाब दे रहा था, पर उन्होंने नही किया। होली के दौरान उस महिला के पुत्र ने साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की थी, इसलिए उसे कड़ी फटकार भी सबके सामने उन्होंने लगायी थी। कुछ और भी मामले थे जिसपर उन्होंने उक्त महिला एवं उसके पुत्र का दवाब नही सहा। इन्ही कारणों से उन्हें फँसा दिया गया। पर उनके पास सारे सबूत हैं और वरीय अधिकारी के भी जानकारी में है।

श्री कुमार ने कहा कि वे न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं। इनसब के बाद भी यदि उन्हें सम्मन मिलता तो वे निश्चित रूप से उपस्थित होते। थानाध्यक्ष रहते हुए उन्हें वैसे भी हर एक दो दिन पर न्यायलय जाना पड़ता है। सम्मन की जानकारी होती तो क्यों नही जाते। हलाँकि उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालत उनके ईमानदारी से काम करने का हौसला नही टूटने देगा और सारे सबूतों के आधार पर उन्हें न्याय मिलेगा।

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