
तो क्या सच दिख जाने के डर से वॉयस ऑफ़ दरभंगा को नही मिला भीआईपी पास! Voice of Darbhanga

दरभंगा: दरभंगा जिले से जुडी तमाम प्रमुख खबरों को नियमित रूप से दिखाने वाले वेब पोर्टल वॉयस ऑफ़ दरभंगा को इसबार 15 नवम्बर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दरभंगा दौरे को कवरेज करने का भीआईपी पास नही दिया गया। ज्ञात हो कि जिला सूचना एवं जन संपर्क कार्यालय द्वारा सभी सरकारी कार्यक्रमो का पास मीडियाकर्मियों को निर्गत किया जाता है। पूर्व में भी वॉयस ऑफ़ दरभंगा को सभी पास मिलते रहे हैं। परंतु विगत कुछ दौरों में मंत्री अधिकारियों के कार्यक्रम के दौरान हुए नकारत्मक घटनाओं एवं विरोध आदि को भी वॉयस ऑफ़ दरभंगा ने दबने नही दिया और पूरी सच्चाई के साथ दिखाया। सूत्रों की माने तो इसी डर के कारण जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी दरभंगा द्वारा मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का पास नही दिया गया है। केवल आधिकारिक खबर मेल से भेजा जाएगा और उसी की जानकारी मिलेगी। इस संदर्भ में पूछने पर जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी कन्हैया कुमार ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा बहुत कम लोगों को पास देने को कहा गया है। अतः इसबार पास नही दिया गया है वॉयस ऑफ़ दरभंगा को। आगे भ्रमण कार्यक्रम आदि में पूर्व की तरह पास जारी किया जाएगा।
मीडिया सूत्रों की माने तो हाल के भीआईपी दौरों में कुछ सच जिसे स्थानीय मीडिया ने दबाने में प्रशासन की पूरी मदद की परंतु वॉयस ऑफ़ दरभंगा ने बिना किसी दवाब के सबूत के साथ दिखा दिया, इसी को देखते हुए इस संक्षिप्त कार्यक्रम का पास वॉयस ऑफ़ दरभंगा को नही दिया गया है। हाल ही में केंद्र सरकार के परिवार कल्याण एवं स्वास्थ राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के दौरे में मीडिया कर्मियों के सवाल पूछे जाने से नगर विधायक द्वारा रोके जाने पर मीडियाकर्मी द्वारा हुए हंगामे को किसी स्थानीय मीडिया ने नही दिखाया। पर वॉयस ऑफ़ दरभंगा ने वीडियो सहित दिखा दिया। इस तरह के कई उदहारण हाल में सामने आये हैं जिनमे स्थानीय मीडिया ने प्रशासनिक कमियों को छिपाने में मदद की, पर वॉयस ऑफ़ दरभंगा ने अपने बेख़ौफ़ अंदाज में उन्हें दिखा दिया। बुधवार के कार्यक्रम में भी हाल ही में जदयू जिलाध्यक्ष के ऊपर लगे 42 ट्रक के राहत सामग्री जे घपले के सवाल उठ जाने और उसपर किसी प्रकार का विवाद उठ जाने पर सच वॉयस ऑफ़ दरभंगा के माध्यम से दिख जाने का डर भी इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण माना जा सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि बिहार के ईमानदार छवि के मुख्यमंत्री नितीश कुमार जो हमेशा कार्यों में पारदर्शिता की बात करते हैं, क्या वे इसबात से खुश होंगे कि उनके कार्यक्रम की पारदर्शिता जनता के सामने न आये! अगर ऐसा नही है तो यह देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री के पारदर्शी छवि को खराब करने की कोशिश करने वाले के ऊपर कोई सख्त कारवाई होती है या नही!

