
पत्रकार बने जेम्स बांड: तीन हफ्ते में खोज निकाला पत्रकार का खोया कीमती मोबाइल। Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
पत्रकार कलम की धार से समाज के दर्पण का कार्य करते ही हैं। कभी कभी अपने कार्यक्षेत्र में बने नेटवर्क का उपयोग कर कुछ बड़ी मुश्किल दिखने वाले कार्यो को कुशलता से पूरा करते हैं। कुशाग्र बुद्धि के उपयोग का एक ताजा उदाहरण आज की सफलता में दिखने को मिला है। दरभंगा के एक दैनिक अखबार के ब्यूरो चीफ का मोबाइल उनके भतीजे केशव कुमार के हाथों दरभंगा जंक्शन से 4 नवम्बर को खो गया था। उन्होंने रेल पुलिस में सनहा भी दर्ज करवा दिया था। अपने एक रिपोर्टर को उन्होंने इसकी सूचना भी दी। मिलने की कहीं कोई उम्मीद नही थी। पर अचानक एकदिन उस नम्बर से बने व्हाट्सएप का डीपी बदला। उस तस्वीर में खड़े एक युवक के पीछे एक सरकारी विद्यालय का बैकग्राउंड था। एक पत्रकार की नजर उस पर पड़ी। पत्रकार संजय कुमार ने तुरन्त अपने साथियों अभिनव कुमार एवं लक्ष्मण कुमार को सारी बात बतायी। चर्चा के दौरान यह खबर वॉयस ऑफ़ दरभंगा के संपादक अभिषेक कुमार तक पहुँची। उन्होंने भी अपने संपर्क सूत्र उस विद्यालय के पहचान केलिए लगा दिए। उस विद्यालय की पहचान डीहरामपुर कन्या मध्य विद्यालय के रूप में हुई। तुरंत उस युवक पता लगाने पत्रकारो की टीम डीहरामपुर पहुँची। स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों की मदद से उस युवक से संपर्क हो गया। पर उस युवक ने मोबाइल किसी अन्य युवक से खरीदा था और उसे वापस कर दिया था। पर वापस करने से पहले गलती से उसी नम्बर से बने व्हाट्सएप में अपनी डीपी बदल दी। उसे पता नही था कि किसी दूसरे नम्बर का व्हट्सएप उस मोबाइल में चालू है। फिर उस बेचने वाले युवक से संपर्क किया। उसने बताया कि उसने वह मोबाइल मुजफ्फरपुर में बेच दिया था और खरीदार उसे लेकर दिल्ली चला गया था। स्थानीय प्रतिनिधियों ने पत्रकारों का पूरा सहयोग किया और उस युवक पर मोबाइल वापस मंगवाने का दवाब बनाया। शनिवार को गाँव के एक प्रतिनिधि ने सूचना दी कि मोबाइल वापस आ गया है। पत्रकारो की टीम ने जाकर मोबाइल प्राप्त किया। शाम में ही अख़बार के कार्यालय जाकर ब्यूरो चीफ के भतीजे एमएलएसएम कॉलेज के बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र केशव कुमार को सौंपा। मोबाइल पाकर केशव के चेहरे पर रौनक देखते ही बनी। केशव ने बताया कि भिभो भी5 मोबाइल करीब 20 हज़ार रुपये मूल्य का था जिसे उसके चाचा जी ने बड़े भरोसे से दिया था। इसे खोकर वह बड़ा मायूस हो गया था। मोबाइल पाकर उसने संजय कुमार, अभिनव कुमार, लक्ष्मण कुमार और अभिषेक कुमार को बहुत बहुत धन्यवाद दिया। ब्यूरो चीफ ने सबका मुँह मीठा करवाने केलिए भी व्यवस्था की।

