
कपड़े दुकान में चोरी कर सीसीटीवी तोड़ देने वाले आधा दर्जन आरोपी गिरफ्तार। Voice of Darbhanga

दरभंगा: लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बाकरगंज स्थित कपड़े की एक दुकान के गोदाम में हुई चोरी मामले में पुलिस ने छह अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्त में आए कई अपराधी अपहरण, लूट, आर्मस एक्ट आदि मामलों में पहले भी जेल चुका है। पूछताछ से यह स्पष्ट हुआ कि चोरी करना इन लोगों का उदेश्य नहीं था। बल्कि, चोरी किए गए सामान को बेचकर हथियार खरीदना और पटना, मुजफ्फरपुर शहरों में बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में था। लेकिन, उससे पहले पुलिस ने पुरे गिरोह को एक साथ दबोच लिया। हालांकि, पुलिस गिरफ्त से अभी भी एक शातिर अपराधी फरार है। लेकिन, पुलिस उसे जल्द दबोचने का दावा कर रही है। गिरफ्त में आया एक बाबुल कुमार महतो बाकरगंज मोहल्ला निवासी राजकुमार महतो का पुत्र है। वह पहले भी दो बार जेल जा चुका है। सूर्या गिरोह के साथ मिलकर उसने लूट व चोरी की एक-एक घटना को अंजाम दे चुका है। बताया जाता है कि इस घटना को अंजाम देने के लिए इसने ही प्लान तय किया था। वहीं दुसरा अपराधी ऋषभ कुमार मुजफ्फरपुर जिले के बांके साह चौक निवासी प्रभू नारायण नागवंशी का पुत्र है। वह अपहरण, आर्मस एक्ट मामले में कई बार जेल जा चुका है। जबकि, तीसरा व चौथा अपराधी क्रमश: रंजीत कुमार, शशि कुमार व मनोज कुमार बाकरगंज मोहल्ला निवासी वैद्यनाथ महतो, रामचंद्र महतो व उमेश पंजियार व का पुत्र है। जबकि, छठा अपराधी चौथा आशिष कुमार चौधरी गो¨वदपुर निवासी राममृर्ति चौधरी का पुत्र है। हालांकि, घटना में शामिल चंदन महतो अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। प्रभारी एसएसपी दिलनवाज अहमद ने बताया कि 17 सितंबर को कपड़ा दुकानदार सुशील कुमार लोहिया के गोदाम में बाबुल, रंजीत, मनोज, चंदन व एक नाबालिग बच्चा ने चोरी की घटना को अंजाम दिया। इन लोगों ने एक लाख 72 हजार रुपये का कपड़ा चोरी किया था। इस दौरान बाबूल ने सीसीटीवी कैमरा को तोड़कर गौदाम में आग लगा दिया। ताकि, चोरी की घटना को लेकर कोई शक नहीं करे। लेकिन, उससे पहले ही सभी का चेहरा कैमरा में कैद हो गया। प्रभारी एसएसपी ने बताया कि डीभीआर के फुटेज से इन लोगों का चेहरा पहले मिलान किया गया इसके बाद जाकर सभी दबोच लिया गया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार अपराधियों के पास से चोरी का कुछ कपड़ा बरामद किया गया है। जबकि, अधिकांश कपड़ों को पहले ही ये लोग बेच चुका था। छापेमारी में थानाध्यक्ष आरके शर्मा सहित कई अधिकारी शामिल थे।
गिरफ्त में आया ऋषभ ने बताया कि वह अपने दोस्त व पटना निवासी प्रकाश तथा अमर के साथ मिलकर मोतीहारी जिले से एक तीन साल की बच्ची का अपहरण वर्ष 2016 में किया था। बच्ची को मुजफ्फरपुर में रखने की बात कह । बच्ची के पिता बड़े व्यवसायी थे। इसलिए बच्ची के बदले एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। लेकिन, उससे पहले ही पुलिस ने बच्ची को बरामद कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पुलिस ने ऋषभ के पास हथियार भी बरामद किया था। मामले को लेकर ऋषभ के खिलाफ मोतीहारी के तुर्कोलिया थाना में दो-दो मामला दर्ज है।
अपहरण मामले में जेल से छुटने के बाद ऋषभ मुजफ्फरपुर में रहना छोड़ दिया। वह दरभंगा के बाकरगंज में एक किराए के मकान में रहने लगा। इसके बाद बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी करने लगा। लेकिन, इन लोगों के पास हथियार व औजार की कमी थी। इसकी पूर्ति के लिए पहले छोटा चोरी की घटना को अंजाम देने के प्लान बनाया। इसी के तहत श्रीमान-श्रीमति कपड़ा दुकान के गोदाम में घटना को अंजाम दिया। पूछताछ में ऋषभ व बाबुल ने बताया कि पटना में एक सोना व एक इलायची के व्यवसायी को लूटने का प्लान बनाया था। इसके लिए एक गाड़ी भी खोज रहा था।
घटना में शामिल एक नाबालिग बच्चा को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हालांकि, पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे सरकारी गवाह बना दिया है। बच्चा ने बताया कि जब ये लोग चोरी की घटना को अंजाम देने जा रहा था तो हमारी मुलाकात अचानक हो गई। इसके बाद डरा कर हमे भी गौदाम तक ले गया। वहां इन लोगों ने भारी मात्रा में कपड़ा चोरी किया। इसके बाद कपड़ा से भरा झोला हमे थमा दिया। जिसे इन लोगों के घर पर पहुंचा दिया। इसके बाद क्या हुआ और क्या नहीं उसे कोई जानकारी नहीं है।

