Home मुख्य जब विधायक भी हुए असफल तो एएसपी दिलनवाज अहमद की सूझबूझ ने खत्म कराया शिक्षकों का अनशन। Voice of Darbhanga
मुख्य - December 13, 2017

जब विधायक भी हुए असफल तो एएसपी दिलनवाज अहमद की सूझबूझ ने खत्म कराया शिक्षकों का अनशन। Voice of Darbhanga

दरभंगा: अपने साढ़े चार साल के बकाये वेतन भुगतान की मांग को लेकर चौथी बार गत 11 दिसम्बर से अनशन पर बैठे पंचायत नगर प्रारम्भिक शिक्षक संघ के बहादुरपुर इकाई शिक्षक-शिक्षिकाओं का अनशन बुधवार देर शाम हाइ वोल्टेज ड्रामा का बाद खत्म हुआ। मुख्यमंत्री के दौरे के कारण धरनास्थल को बुधवार की शाम हरहाल में खाली करवाना था क्योंकि इसी के सामने हैलीपैड है और कम से कम 72 घण्टे पूर्व खाली करवाना होता है क्षेत्र को। इस कारण तमाम मशक्कत प्रशसनिक पदाधिकारियों द्वारा किया गया। सदर एसडीओ गजेंद्र प्रसाद सिंह एवं प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी महेश प्रसाद के सामने बहादुरपुर विधानसभा के राजद विधायक भोला यादव को भी धरनास्थल पर बुलवाकर उनसे आश्वासन दिलवाया गया कि यदि गुरूवार को भुगतान नही हुआ तो वे भी शिक्षकों के साथ धरना पर बैठेंगे। पर अनशन समाप्त कर दिया जाय। पर हड़ताली शिक्षक टस से मस नही हुए। उनका कहना था कि पूर्व में भी हाइकोर्ट के आदेश रहने और जिलाधिकारी के एक सप्ताह में भुगतान के आश्वासब के वाबजूद भी नही हुआ। डीईओ कार्यालय से जुड़े मन्टुन चौधरी नामक एक व्यक्ति द्वारा एक एक लाख रूपये सभी 29 शिक्षकों से बार बार मांग करने की बात भी शिक्षकों द्वारा बतायी गयी। शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट आदेश और जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद भी मन्टुन चौधरी ने दावा किया था कि बिना एक एक लाख रूपये दिए कोई भुगतान नही होगा। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि मन्टुन चौधरी द्वारा खुलेआम दलाली की जाती है जिसकी सैकड़ों शिकायत रहने के वाबजूद कोई कारवाई नही होती क्योंकि सबके लिए उगाही का कार्य वही करता है। इसलिए वे भरोसा नही करेंगे। काफी मशक्कत के बाद जब बात नही बनी तो श्री यादव को यह बात अपने मान सम्मान के साथ खिलवाड़ लगा और यही बात कहते हुए वे निकल गए। हलाँकि युवा राजद के महानगर अध्यक्ष कुंदन महतो को वहीँ रहकर स्थिति देखने को कहते गये।

हर कोशिश और आश्वासन नाकाम होने के बाद प्रशासन द्वारा धरनास्थल खाली करवाने की जिम्मेवारी अंततः एएसपी दिलनवाज अहमद को सौंपी गयी। अपने चिरपरिचित अंदाज में श्री अहमद प्रेम पूर्वक चेतावनी भरे लहजे में पहले समझाए कि उनकी मांग मान ली गयी है, अब वे नही उठेंगे तो सीएम के दौरे को देखते हुए सुरक्षा में बाधा पहुंचाने केलिए उनोलोगो पर कानूनी कारवाई भी हो सकती है। इसपर कुछ शिक्षक डरे भी। परन्तु महिला शिक्षिकाओं पर इसका उल्टा ही प्रभाव पड़ा। उन्होंने क्रांतिकारी अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जेल भेजें या गोली चलाया जाय, जबतक उनके चार साल के वेतन का भुगतान नही होगा, वे नही हटेंगे।

अपनी बाजी उल्टी पड़ते देख श्री अहमद ने भी टोन बदला और खुद के भी पुलिस से पहले शिक्षक के नौकरी में होने और शिक्षकों की मेहनत एवं दर्द समझने की कहानियां शेयर करनी शुरू की। अपनी पूरी सहानभूति दिखाते हुए उन्होंने तमाम पदाधिकारियों से लाइनअप किया और रातोंरात बीइओ द्वारा बिल बनाने का काम शुरू हुआ। उपस्थित डीईओ ने बताया कि बीईओ के पास अगस्त 2015 तक की अब्सेंटी मौजूद है और रातोंरात ये सब बिल तैयार होगा और सुबह 9 बजे वे दस्तखत कर देंगे। साथ ही साथ श्री अहमद के सामने सारे शिक्षकों के कहने पर डीईओ द्वारा शेष अब्सेंटी केलिए रातोंरात लेटर तैयार कर बीइओ को देने और सारे स्कूल के प्रधान को फोनिक सूचना दिलवाकर 11 बजे तक कार्यालय में जमा करने का आश्वासन दिया। अब्सेंटी आते ही बाकी बिल भी बनाकर भुगतान तुरंत करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद एएसपी श्री अहमद ने शिक्षकों को खुद भीड़कर जल्द अब्सेंटी कलेक्ट करने में लगने को कहा गया। किसी भी समस्या होने पर डीईओ को सीधे फोन करने को कहा गया। शिक्षकों ने श्री अहमद का मोबाइल नम्बर लिया और कहा कि यदि नही हुआ तो वे श्री अहमद को ही कॉल करेंगे। श्री अहमद ने भी आश्ववस्त किया। साथ ही साथ शिक्षकों ने उनसे वादा लिया कि अगर नही हुआ तो अगलीबार वे भी उनके साथ धरना पर बैठेंगे।

करीब दो घण्टे चले इस हाई वोल्टेज मशक्कत के बाद धरना खत्म होने के कगाड पर अंततः आ गया। पर शिक्षकों के नेतृत्वकर्ता का श्रेय लेने को लेकर अंततः मामला फँसा। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शम्भू यादव वहाँ मौजूद थे। पर उनके नेतृत्वकर्ता सौरव सिंह शिक्षकों से फाइनल वार्ता के समय शिक्षकों को धरनास्थल पर छोड़ घर जा चुके थे। फिर उन्हें बुलवाया गया। करीब एक घण्टे तक एसडीओ डीएसपी एवं डीईओ खड़े रहे। सौरव सिंह के आने पर मामला ईगो के कारण पुनः फंसता दिखा। सौरव सिंह को लगा कि नेतृत्व उन्होंने किया पर श्रेय शम्भू यादव न ले ले। इसको लेकर फिर से इधर बात उधर बात होने लगी। कुछ कड़े भाषाओं का उपयोग दोनों नेताओं द्वारा डीईओ पर भी कर दिया गया। इसपर एएसपी श्री अहमद तब भड़क गए गये और दोनों नेताओं को मर्यादा में रहकर काम करने की चेतावनी दी। उन्होंने नसीहत दी कि नेता हैं तो ऐसी राजनीति न करे और जाकर जो तकनीकी बाधा है भुगतान में, उसे लग भीड़कर आज से कल तक में दूर करवाएं। सारे अधिकारी उनके साथ हैं।

इस पूरे प्रकरण और आश्वासन के बाद अंततः शिक्षकों ने रात्रि लगभग नौ बजे धरनास्थल खाली किया।

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